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कविता में जिन रीति रिवाजों का मार्मिक चित्रण हुआ है, उनका वर्णन कीजिए।

प्रस्तुत कविता ‘मेघ आये’ में रीति-रीवाजों का मार्मिक चित्रण हमें देखने को मिलता है। गांवों में अक्सर देखने को मिलता है कि लोग किसी घर के दामाद को सारे गांव के दामाद की संज्ञा दे देते हैं। हालांकि हाल के आधुनिकता की ओर बढ़ते भारतीय समाज में इस प्रकार की सोच में कमी आई है और फिर कविता भी तो बीसवीं सदी के भारतीय समाज की है। प्रस्तुत कविता में उस समय के गांव के बारे में एक-एक बात सत्य प्रतीत होती है। कि कैसे गांव में मेहमान(दामाद) के आने पर सारे वातावरण में जैसे खुशी का संचार हो जाता था। किशोर लड़कियाँ अपने घाघरों को थोड़ा उपर उठाकर मेहमान के आने के बारे में सूचना देने हेतु अपने घरों की ओर दौड़ पड़ती थी। बड़े-बूढ़े खुशी के मारे कैसे झूमने लगते हैं। विवाहिताएं किस प्रकार ठिठक कर कनखियों से उसे देखकर स्नेहसिक्त हो उठती हैं। घर का कोई सदस्य उसके लिये पानी लाता है। उसकी पत्नी उसे आया देखकर शरमा-सकुचा जाती है। इस कविता में ग्रामीण समाज के इन्हीं सब रीति रिवाजों का मार्मिक चित्रण किया गया है|


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