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कविता में मेघ को ‘पाहुन’ के रूप में चित्रित किया गया है। हमारे यहाँ अतिथि (दामाद) को विशेष महत्व प्राप्त है, लेकिन आज इस परंपरा में परिवर्तन आया है। आपको इसका क्या कारण नजर आता है, लिखिए।

मैं गांवों में भी आज अतिथि(दामाद) को पहले की भांति सम्मान ना मिल पाने के लिए समाज में बढ़ती आधुनिकता की प्रवृत्ति को उत्तरदायी मानता हूं। आज लोगों के जीवन में इस आधुनिकता के प्रवेश करने पर रिश्तों के बीच गंभीरता का स्थान औपचारिकता ले रही है। लोग पहले की तरह सीधे-सादे और निस्वार्थी नहीं रहे। सभी लोग अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं। सबसे बुरी बात है कि अब यह बीमारी धीरे-धीरे गांवों को भी अपनी चपेट में ले रही है। ऐसे में लोगों के बीच शिष्टाचार की भावना की जगह रुपये-पैसे की चाहत अपनी जगह ले रही है। जिस स्थान पर रिश्तों का स्थान पैसा लेगा वहां पर संबंधों में छिछलापन आने में देरी नहीं लगती है। भौतिकवादी होते जा रहे आज के समाज में लोग संबंधों को निभाना एक मूर्खतापूर्ण कदम मान रहे हैं। इस दमघोंटू माहौल में अतिथि(दामाद) जैसे नाजुक रिश्तों का भी इन्हीं कारणों से सम्मान कम हो रहा है।


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