निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-
सीधे धरातल पर दरार पड़ने का विचार और इस दरार का गहरे-चौड़े हिम-विदर में बदल जाने का मात्र खयाल ही बहुत डरावना था। इससे भी ज्यादा भयानक इस बात की जानकारी थी कि हमारे संपूर्ण प्रयास के दौरान हिमपात लगभग एक दर्जन आरोहियों और कुलियों को प्रतिदिन छूता रहेगा।
आशय- हिमपात का अव्यवस्थित रूप से गिरना स्वयं में डरावना था। धरातल में दरार पड़ने का विचार और हिमपात तथा ग्लेशियर के बहने की वजह से बड़ी-बड़ी बर्फ की चट्टानों के गिरने का बात सुनकर लेखिका का भयभीत होना स्वाभाविक था। बर्फ की चट्टानों के गिरने से कई बार धरातल पर पड़ी दरारें बहुत गहरी और चौड़ी बर्फ से ढकी हुई गुफाओं में बदल जाती थीं, जिनमें धंसकर मनुष्य की यदि मृत्यु भी हो जाए तो कोई असामान्य बात नहीं थी।
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