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निम्नलिखित शब्दों की बनावट को ध्यान से देखिए और इनका पाठ से भिन्न किसी नए प्रसंग में वाक्य प्रयोग कीजिए-

आकर्षक- गुलाब का फूल बहुत आकर्षक लगता है।


यथार्थ- कल्पना नहीं यथार्थ को महत्त्व देना चाहिए|


तटस्थता- तटस्थ नेताओं की वजह से देश भ्रष्ट हो गया है।


कलाभिज्ञ- कलाभिज्ञ लोग अपनी कला के प्रति बहुत ईमानदार रहते हैं।


पदचिन्ह- बड़ों के पदचिन्हों पर चलने से सही मंजिल पर पहुंच सकते हैं।


अंकित- दीवारों पर अंकित भाषा सालों पुरानी मालूम होती है।


तृप्ति- मन पसंद खाना खाने से तृप्ति मिल जाती है।


जागृत- स्वच्छता के लिए लोगों को जागृत करना जरूरी है।


घृणास्पद- घृणास्पद काम करने वालों को प्यार से समझाओ तो वो समझ सकते हैं।


युक्तिशून्य- दुनिया में युक्तिशून्य बातें करने वालों की कमी नहीं है।


वृत्ति- अच्छी वृत्ति वाले लोग इस कलयुगी दुनिया में खत्म हो गए हैं।


सनातन- सनातन व्यक्ति की बातों में हमेशा ज्ञान झलकता है।


लुप्त- धीरे-धीरे शेर लुप्त होते जा रहे हैं।


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1

निम्नलिखित शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखिए-

जलाशय


सिंधु


पंकज


पृथ्वी


आकाश

2

निम्नलिखित वाक्यों में कारकों को रेखांकित कर उनके नाम भी लिखिए-

क) कीचड़ का नाम लेते ही सब बिगड़ जाता है।


ख) क्या कीचड़ का वर्णन कभी किसी ने किया है।


ग) हमारा अन्न कीचड़ से ही पैदा होता है।


घ) पदचिन्ह उस पर अंकित होते हैं।


ङ) आप वासुदेव की पूजा करते हैं।

4

नीचे दिए गई संयुक्त क्रियाओं का प्रयोग करते हुए कोई अन्य वाक्य बनाइए-

क) देखते-देखते वहाँ के बादल श्वेत पूनी जैसे हो गए।


ख) कीचड़ देखना हो तो सीधे खंभात पहुँचना चाहिए।


ग) हमारा अन्न कीचड़ में से ही पैदा होता है।

5

, नही, मत का सही प्रयोग रिक्त स्थानों पर कीजिए-

क) तुम घर..............जाओ।


ख) मोहन कल....... जाएगा।


ग) उसे................जाने क्या हो गया है?


घ) डाँटो..................प्यार से कहो।


ङ) मैं वहाँ कभी............... जाऊँगा।


च) ................वह बोला.................मैं।