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पाठ से

कमरे में फिर से शोर पर भी पिताजी अबकी बार गौरेया की तरफ़ देखकर मुसकुराते क्यो रहे?


घर में दो गौरैयों ने पंखे पर अपना घोसला बना लिया था। पिता जी ने उन दोनों गौरैयों को भगाने की बहुत कोशिश की। पिता जी हर रोज कोशिश कर रहे थे। लेकिन गौरैया कहीं ना कहीं से फिर अंदर आ जाती थीं। एक दिन पिता जी ने सोचा कि गौरैया का घोसला तोड़ देते हैं तो फिर वो हमेशा के लिए चली जाएंगी। पिता जी ने जब घोसला तोड़ना शुरू किया तो उसके अंदर से चीं चीं की आवाजें आने लगी। उन नन्हीं गौरैयों को देख पिता जी का मन पसीज गया। उन्होंने घोसला तोड़ने का इरादा त्याग दिया। उन्होंने लाठी को एक ओर रख दिया। गौरैया उड़कर अपने बच्चों के पास आ बैठीं ये नजारा देख पिताजी गौरैयों की ओर देख सिर्फ मुस्कुराते रहे।


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पाठ से

देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो। माँ ने पिताजी से गंभीरता से यह क्यों कहा?


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पाठ से

“किसी को सचमुच बाहर निकालना हो तो उसका घर तोड़ देना चाहिए,” पिताजी ने गुस्से मे ऐसा क्यो कहा? क्या पिताजी के इस कथन से माँ सहमत थी? क्या तुम सहमत हो? अगर नहीं तो क्यों?


2

पशु-पक्षी और हम

इस कहानी के शुरू में कई पशु-पक्षियों की चर्चा की गई है। कहानी में वे ऐसे कुछ काम करते हैं जैसे मनुष्य करते हैं। उनको ढूँढ़कर तालिका पूरी करो।


क) पक्षी- घर का पता लिखवाकर लाये हैं|


ख) बूढ़ा चूहा-


ग) बिल्ली-


घ) चमगादड़-


ङ) चींटियाँ-


3

मल्हार

नीचे दिए गए वाक्य को पढ़ो-


“जब हम लोग नीचे उतरकर आए, तब वे फिर से मौजूद थीं और मज़े से बैठी मल्हार गा रही थीं।”


क) अब तुम पता करो कि मल्हार क्या होता है? इस काम में तुम बड़ों की सहायता भी ले सकते हो।


ख) बताओ कि क्या सचमुच चिड़ियाँ ‘मल्हार’ गा सकती हैं?


) बताओ की कहानी में चिड़ियों द्वारा मल्हार गाने की बात क्यों कही गई है?