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गौरेयों की चर्चा

मान लो तुम लेखक के घर की एक गौरेया हो। अब अपने साथी गौरेया को बताओ कि तम्हारे साथ इस घर मे क्या-क्या हुआ?


मेरा पुराना घोंसला तोड़ दिया गया था और तब मैंने अपने लिए नया घोंसला बनाने के लिए जगह खोजनी शुरू की| तभी मुझे यह घर दिखा और वहाँ मैंने पंखे के ऊपर अपना घोंसला बना लिया| लेकिन बाद में मकान के मालिक को वहाँ पंखे के ऊपर हमारा घोंसला बनाना पसंद नहीं आया और उसने हमारे घोंसल को तोड़ने के अथक प्रयास किये| हमें भगाने की पुरजोर कोशिशें की लेकिन हमने भी ठान लिया था कि हम अपना घोंसला छोड़कर नहीं जाने वाले| इस घर के कुछ लोग हमारा घोंसला तोड़ने का विरोध भी कर रहे थे जैसे कि-माँ| अंत में घोंसला तोड़ने के अथक प्रयासों के बाद भी पिताजी को इसमें सफलता नहीं मिली और उन्होंने हमारा घोंसला न तोड़ने का निर्णय लिया|


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किससे क्यों-कैसे

“पिताजी बोले, क्या मतलब? मैं कालीन बरबाद करवा लूँ?” ऊपर दिए गए वाक्य पर ध्यान दो और बताओ कि-


क) पिताजी ने यह बात किससे कही?


ख) उन्होंने यह बात क्यों कही?


घ) गौरेयों के आने से कालीन कैसे बरवाद होता?


8

सराय

“पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है।” ऊपर के वाक्य को पढ़ों और बताओ कि


क) सराय और घर में क्या अंतर होता है? आपस में इस पर चर्चा करो।


ख) पिताजी को अपना घर सराय क्यों लगता है?


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कैसे लगे

तुम्हें इस कहानी मे कौन सबसे अधिक पसंद आया? तुम्हें उसकी कौन-सी बात सबसे अधिक लगी?


(क) माँ (ख) पिताजी (ग) लेखक (घ) गौरेया (ड) चूहे (च) बिल्ली (छ) कबूतर (ज) कोई अन्य/कुछ और


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माँ की बात

नीचे माँ के द्वारा कही गई कुछ बातें लिखी हुई हैं। उन्हें पढ़ो।


“अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। ”


“एक दरवाजा खुला छोड़ो, बाकी दरवाजें बंद कर दो। तभी ये निकलेंगी।”


“देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो। अब तो इन्होंने अंडे भी दे दिए होंगे। अब ये यहाँ से नहीं जाएँगी।”


अब बताओ कि-


क) क्या मां सचमुच चिड़ियों को घर से निकालना चाहती थीं?


ख) माँ बार-बार क्यों कह रही थीं कि ये चिड़ियाँ नहीं जाएँगी?