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अंदर आने के रास्ते

अब अपने घर के बारे में सोचो। तुम्हारे घर में यदि गौरेया आना चाहे तो वह कहाँ-कहाँ से अंदर घुस सकती है? इसे अपने शिक्षक को बताओ।


हमारे घर में दो कमरे और एक हॉल है। घर चारों से खुला खुला बना है। वैसे तो कमरों की खिड़कियां कभी कभी ही खुलती हैं। लेकिन अगर हॉल का दरवाजा खोल दें तो बाहर बैठे कबूतर अंदर जरूर आ सकते हैं। एक बार तो दो कबूतर घर के अंदर आ गए और पूरा दिन घर में ही उड़ उड़कर खेलते रहे। दरवाजे से दोनों को बाहर भगाने में काफी दिक्कत हुई।


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पाठ से आगे

अलग-अलग पक्षी अलग-अलग तरह से घोंसला बनाते हैं। तुम कुछ पक्षियों के घोसलों के चित्र इकट्ठे करके अपनी कॉपी पर चिपकाकर शिक्षक को दिखाओ।


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अंदर आने के रास्ते

पूरी कहानी में गौरेया, कहाँ-कहाँ से घर के अंदर घुसी थीं? सूची बनाओ।


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कहने का अंदाज़

“माँ खिलखिलाकर हंस दीं।” इस वाक्य में ‘खिल-खिलाकर’ शब्द बता रहा है कि माँ कैसे हँसी थीं। इसी प्रकार नीचे दिए गए रेखांकित शब्दों पर भी ध्यान दो। इन शब्दों से एक-एक वाक्य बनाओ।


क) पिताजी ने झिड़ककर कहा, “तू खड़ा क्या देख रहा है?”


ख) “आज दरवाज़े बंद रखो,” उन्होंने हुक्म दिया।


ग) “देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो,” माँ ने अबकी बार गंभीरता से कहा।


घ) “किसी को सचमुच बाह निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए.” उन्होंने गुस्से में कहा


तुम इनसे मिलते-जुलते कुछ और शब्द सोचो और उनका प्रयोग करते हुए कुछ वाक्य बनाओ।


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किससे क्यों-कैसे

“पिताजी बोले, क्या मतलब? मैं कालीन बरबाद करवा लूँ?” ऊपर दिए गए वाक्य पर ध्यान दो और बताओ कि-


क) पिताजी ने यह बात किससे कही?


ख) उन्होंने यह बात क्यों कही?


घ) गौरेयों के आने से कालीन कैसे बरवाद होता?