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किन बातों से ज्ञात होता है कि माधवदास का जीवन संपन्नता से भरा था और किन बातों से ज्ञात होता है कि वह सुखी नहीं था?

माधवदास का जीवन संपन्नता से भरा हुआ था क्योंकि उसके पास बहुत धन था। सोने, चांदी, हीरे, जवाहरात से उसके खजाने भरे हुए थे। वो उस शहर का सबसे अमीर आदमी माना जाता था। उसने संगमरमर से अपना महल बनवाया था जिसमें सुंदर बगीचा था। बगीचे में पानी के फव्वारे और तरह—तरह के फूल थे।

माधवदास सुखी नहीं था क्योंकि वो अकेला था। उसके घर में परिवार नहीं था। उसके आंगन में कोई चहचहाता नहीं था। वो अकेले ही शाम को अपने बगीचे में बैठ वक्त गुजार देता था। इन सभी बातों से उसकी संपन्नता और उसके दुख का अंदाजा होता है|


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2

माधवदास क्यों बार-बार चिडि़या से कहता है कि यह बगीचा तुम्हारा ही है? क्या माधवदास निःस्वार्थ मन से ऐसा कह रहा था? स्पष्ट कीजिए।

3

माधवदास के बार-बार समझाने पर भी चिडि़या सोने के पिंजरे और सुख-सुविधाओं को कोई महत्व नहीं दे रही थी। दूसरी तरफ़ माधवदास की नजर में चिडि़या की जिद का कोई तुक न था। माधवदास और चिडि़या के मनोभावों के अंतर क्या-क्या थे? अपने शब्दों में लिखिए।

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कहानी के अंत में नन्ही चिडि़या का सेठ के नौकर के पंजे से भाग निकलने की बात पढ़कर तुम्हें कैसा लगा? चालीस-पचास या इससे कुछ अधिक शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया लिखिए।

5

माँ मेरी बाट देखती होगी’ नन्ही चिडि़या बार-बार इसी बात को कहती है। आप अपने अनुभव के आधार पर बताइए कि हमारी जिंदगी में माँ का क्या महत्त्व है?