इस कहानी में आपने देखा कि वह चिडि़या अपने घर से दूर आकर भी फिर अपने घोंसले तक वापस पहुँच जाती है। मधुमक्खियों, चीटियों, ग्रह-नक्षत्रें तथा प्रकृति की अन्य विभिन्न चीजों में हमें एक अनुशासनबद्धता देखने को मिलती है। इस तरह के स्वाभाविक अनुशासन का रूप आपको कहाँ-कहाँ देखने को मिलता है? उदाहरण देकर बताइए।
मानव के अलावा पूरी प्रकृत्ति ही अनुशासन में चलती है। जैसे चांद और सूरज अपने समय पर निकलते और समय से ही ढल जाते हैं। पौधों में फूल और फल आने का समय निश्चित होता है। सर्दी, गर्मी और बरसात जैसे मौसम भी ठीक उसी समय पर आते हैं जब उन्हें आना होता है। पशु-पक्षी एक निश्चित समय पर ही अपने घर से खाने की तलाश में निकलते हैं और फिर शाम डलने तक लौट आते हैं। इसके अलावा मंदिरों का अपने समय पर खुल जाना अनुशासन है। इस प्रकार हम अगर यह कहें की मानव के अलावा प्रकृति में प्रत्येक बस्तु पूर्ण अनुशासन में रहती है बस मानव ही अनुशासन में नहीं रहता तो यह बता अतिश्योक्ति नहीं होगी|
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