कहानी के अंत में नन्ही चिडि़या का सेठ के नौकर के पंजे से भाग निकलने की बात पढ़कर तुम्हें कैसा लगा? चालीस-पचास या इससे कुछ अधिक शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया लिखिए।
जैसे ही नौकर चिड़िया को पकड़ने के लिए आगे बढ़ता है वो उसके हाथों से निकलकर भाग जाती है। ये पढ़कर बहुत खुशी मिलती है। चिड़िया उस कपटी माधवदास के चंगुल से निकलकर भागती है और सीधा अपनी मां की गोद में ही सांस लेती है। चिड़िया ने बहुत ही होशियारी से काम लिया। वो अभी बच्ची थी लेकिन उसने माधवदास के इरादों पर पानी फेर दिया। चिड़िया को भी पता चल गया होगा कि इस दुनिया में कितने स्वार्थी लोग होते हैं जो उसे उसकी मां से दूर करने तक को तैयार थे। जब चिड़िया को उसकी आजादी मिली तब पाठक के चेहरे पर मुस्कान आना लाजमी है।
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