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आपने गौर किया होगा कि मनुष्य, पशु, पक्षी- इन तीनों में ही माँएँ अपने बच्चों का पूरा-पूरा ध्यान रखती हैं। प्रकृति की इस अद्भुत देन का अवलोकन कर अपने शब्दों में लिखिए।

एक मां अकेले ही अपने बच्चे को पूरी दुनिया का प्यार और खुशी दे सकती है। इसलिए प्रकृति ने हम सब को अद्भुत मां दी है। अगर हमारे आस-पास कोई भी ना हो तो मां एक दोस्त, रिश्तेदार और साथी की कमी पूरी कर देती है। अपने बच्चे की मन की बात को बिना कहे जान लेने की मां में असीम शक्ति होती है। दूर बैठे उसके बच्चे को अगर कोई कष्ट होता है तो मां को वो भी पता चलते देर नहीं लगती। मां का मन हमेशा अपने बच्चे के साथ जुड़ा रहता है। फिर चाहे वो मनुष्य की मां हो या पशु की या पक्षी की। बच्चे को बचपन से बड़े तक जो भी अच्छी शिक्षाएं होती हैं वो सब मां ही देती है। बच्चों का फर्ज बनता है कि वे भी अपनी मां को एक मां बनकर ही प्यार करें।


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इस कहानी में आपने देखा कि वह चिडि़या अपने घर से दूर आकर भी फिर अपने घोंसले तक वापस पहुँच जाती है। मधुमक्खियों, चीटियों, ग्रह-नक्षत्रें तथा प्रकृति की अन्य विभिन्न चीजों में हमें एक अनुशासनबद्धता देखने को मिलती है। इस तरह के स्वाभाविक अनुशासन का रूप आपको कहाँ-कहाँ देखने को मिलता है? उदाहरण देकर बताइए।

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सोचकर लिखिए कि यदि सारी सुविधाएँ देकर एक कमरे में आपको सारे दिन बंद रहने को कहा जाए तो क्या आप स्वीकार करेंगे? आपको अधिक प्रिय क्या होगा- ‘स्वाधीनता’ या ‘प्रलोभनोंवाली पराधीनता’? ऐसा क्यों कहा जाता है कि पराधीन व्यक्ति को सपने में भी सुख नहीं मिल पाता। नीचे दिए गए कारणों को पढ़ें और विचार करें-

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पाठ में पर शब्द के तीन प्रकार के प्रयोग हुए हैं-

(क) गुलाब की डाली पर एक चिड़या आन बैठी।


(ख) कभी पर हिलाती थी।


(ग) पर बच्ची काँप-काँपकर माँ की छाती से और चिपक गई।


तीनों ‘पर’ के प्रयोग तीन उद्देश्यों से हुए हैं। इन वाक्यों का आधार लेकर आप भी ‘पर’ का प्रयोग कर ऐसे तीन वाक्य बनाइए जिनमें अलग-अलग उद्देश्यों के लिए ‘पर’ के प्रयोग हुए हों।


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पाठ में तैंने, छनभर, खुश करियो-तीन वाक्यांश ऐसे हैं जो खड़ी बोली हिंदी के वर्तमान रूप में तूने, क्षणभर, खुश करना लिखे-बोले जाते हैं लेकिन हिंदी के निकट की बोलियों में कहीं-कहीं इनके प्रयोग होते हैं। इस तरह के कुछ अन्य शब्दों की खोज कीजिए।