Q5 of 11 Page 73

माँ मेरी बाट देखती होगी’ नन्ही चिडि़या बार-बार इसी बात को कहती है। आप अपने अनुभव के आधार पर बताइए कि हमारी जिंदगी में माँ का क्या महत्त्व है?

चिड़िया का बार-बार ये कहना कि ‘माँ मेरी बाट देखती होगी’ से पता चलता है कि वो अपनी मां से दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करती है। हर किसी को अपनी मां से प्यार होता है। बचपन ने मां ही होती हमारी हर छोटी-बड़ी चीजों का ख्याल रखती है। अपना एक रोटी कम खा लेगी लेकिन अपने बच्चे को पेट भर खिलाती है। बड़े होने पर भी मां का प्यार खत्म नहीं होता है। अपने बच्चे के दूर रहने पर मां का मन उसके पास ही रखा रहता है। वो हर पल यही सोचती है कि पता नहीं बच्चे ने खाना खाया होगा या नहीं। बच्चे भी अपनी मां के हाथ के खाने को हमेशा याद करते हैं। बच्चों के लिए उनकी मां से अच्छा खाना तो कोई बना ही नहीं सकता।


More from this chapter

All 11 →
3

माधवदास के बार-बार समझाने पर भी चिडि़या सोने के पिंजरे और सुख-सुविधाओं को कोई महत्व नहीं दे रही थी। दूसरी तरफ़ माधवदास की नजर में चिडि़या की जिद का कोई तुक न था। माधवदास और चिडि़या के मनोभावों के अंतर क्या-क्या थे? अपने शब्दों में लिखिए।

4

कहानी के अंत में नन्ही चिडि़या का सेठ के नौकर के पंजे से भाग निकलने की बात पढ़कर तुम्हें कैसा लगा? चालीस-पचास या इससे कुछ अधिक शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया लिखिए।

6

इस कहानी का कोई और शीर्षक देना हो तो आप क्या देना चाहेंगे और क्यों?

1

इस कहानी में आपने देखा कि वह चिडि़या अपने घर से दूर आकर भी फिर अपने घोंसले तक वापस पहुँच जाती है। मधुमक्खियों, चीटियों, ग्रह-नक्षत्रें तथा प्रकृति की अन्य विभिन्न चीजों में हमें एक अनुशासनबद्धता देखने को मिलती है। इस तरह के स्वाभाविक अनुशासन का रूप आपको कहाँ-कहाँ देखने को मिलता है? उदाहरण देकर बताइए।