‘और देखते ही देखते नयी दिल्ली का काया पलट होने लगा’- नयी दिल्ली के काया पलट के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए गए होंगे?
नयी दिल्ली के कायापलट के लिए काफी प्रयास किये गये होंगे। लुटियन नयी दिल्ली की वास्तुकला या कहें भवन निर्माण की कला में वास्तुकार होने के नाते भागीदार था। उसकी शान को बढाने में स्वतंत्र भारत में कोई कमी नहीं रखी गयी होगी। सरकारी तंत्र ने दिल्ली की शोभा सुंदरता में चार चांद लगाने में कोई कसर नहीं छोङी होगी। रानी के स्वागत में जगह-जगह तोरण द्वार बनाये गये होंगे। साफ-सफाई की ऐसी व्यवस्था की गई होगी कि ब्रिटिश भी शर्मा जाएं। गरीबों को इस तरह कहीं दूर भेज दिया गया होगा कि रानी भारत की आर्थिक स्थिति के बारे में धोखे में आ जाएं। सुरक्षा व्यवस्था काफी चुस्त और चौकसपूर्ण कर दी गई होगी कि कहीं परिंदे को भी पर मारने की इजाजत नहीं होगी। कहने का मतलब है कि दिल्ली की तमाम आर्थिक, प्रशासनिक, सामाजिक व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन कर दिये गये होंगे। रानी के रेड कारपेट वेलकम हेतु सारे सरकारी अमलों ने एङी चोटी का जोर लगा दिया होगा। रानी के आगमन से लेकर उनके प्रस्थान तक उनके सामने आने वाली प्रत्येक बाधा को नष्ट कर दिया गया होगा। नष्ट नहीं कर पाने की स्थिति में बाधा को दूर धकेल दिया गया होगा।इस प्रकार नयी दिल्ली के कायापलट हेतु काफी प्रयत्न किये गये होंगे।
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