प्रस्तुत कहानी में जगह-जगह कुछ ऐसे कथन आए हैं जो मौजूदा व्यवस्था पर करारी चोट करते हैं। उदाहरण के लिए ‘फाइलें सब कुछ हजम कर चुकी हैं।’ ‘सब हुक्कामों ने एक दूसरे की तरफ ताका।’ पाठ में आए ऐसे अन्य कथन छाँटकर लिखिए।
ऐसे अन्य कथनों में एक है- शंख इंग्लैंड में बज रहा था, गूँज हिंदुस्तान में हो रही थी। कहने का अर्थ है रानी का भारत दौरा तो ब्रिटेन के लिये हर्ष का विषय होनी चाहिए और यहाँ भारत में इस दौरे का उत्सवीकरण किया जा रहा था। इसी उपलक्ष्य में लेखक ने उक्त कथन का उल्लेख किया है। वास्तव में यहाँ पर हम भारतीयों के अंग्रेजियत के गुलाम बनने के बारे में उक्त उदाहरण देकर समझाया गया है। यह कि हम किसी भी प्रकार अंग्रेजियत का ढिंढोरा पिटने में उन अंग्रेजों से भी आगे रहना चाहते हैं।
लेखक ने इसी प्रकार एक दूसरे कथन का उल्लेख किया है- दिल्ली में सब था- सिर्फ जॉर्ज पंचम की लाट पर नाक नहीं थी। इसका अर्थ है दिल्ली में या कहें हमारे संपूर्ण भारत में ऐसी कई विभूतियां रही हैं जो अपनी लोक छवि के मामले में जार्ज पंचम की छवि से ऊँची हैं। इन भारतीयों का नाम इनके भारतीय होने से हुआ है। कहने का अर्थ है इन्होंने अपनी पहचान भारतीय मिट्टी में रम कर बनाई न कि अंग्रेजों की जी हुजुरी कर के।
एक अन्य कथन- पुरातत्व विभाग की फाइलों के पेट चीरे गए, पर कुछ पता नहीं चला का दिलचस्प अर्थ है कि पुराने दिनों की फाइलों में भारतीयों पर ब्रिटिशसर्स खासकर जार्ज पंचम के द्वारा व्यवहार के नमूने खोजने पर सरकारी तंत्र को जार्ज पंचम के निरंकुश स्वभाव वाला व्यक्ति होने, उसके पशुओं का शिकार प्रिय होने पर जार्ज पंचम के पक्ष में कुछ नहीं मिला।
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