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नाम मान-समान व प्रतिष्ठा का द्योतक है। यह बात पूरी व्यंग्य रचना में किस तरह उभरकर आई है? लिखिए।

नाम मन-सम्मान और प्रतिष्ठा का द्योतक हैं। यह बात पूरी तरह व्यंग्य रचना में उभर कर आयी है। यहाँ मान-सम्मान से मतलब भारतीयों के मान-सम्मान से है। यह इंडिया गेट में प्रथम विश्वयुद्ध में शहीद हुए भारतीय अमर जवानों की याद में बनाया गया स्मारक है| भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ब्रिटिश सैनिकों से लङकर शहीद हुए भारतीय हों या फिर इसी हेतु संघर्ष में कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की वर्षों लंबी जेल यात्रा हो। इन सब में एक बात सबों में लागू होती है कि इन सभी नामों ने भारत और अपने मान-सम्मान में वृद्धि की। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने हमें विदेशी गुलामी से मुक्ति दिलाई यानि हमें स्वतंत्र कराया। उनका स्थान प्रस्तुत व्यंग्य रचना में काफी ऊँचा बनकर हमारे सामने आया है। हमें साफ बताया गया है कि स्वतंत्रता सेनानियों की नाक जार्ज पंचम पर फिट नहीं बैठती है। इस प्रकार नाम मान-सम्मान और प्रतिष्ठा का द्योतक है।


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