प्रस्तुत पदों के आधार पर गोपियों का योग-साधना के प्रति दृष्टिकोण स्पष्ट करें।
जिस प्रकार किसी प्रेमी को सिर्फ और सिर्फ उसकी प्रेमिका ही दिखती है ठीक उसी प्रकार गोपियों को श्री कृष्ण दिखते हैं। गोपियाँ श्री कृष्ण के प्रेम में पागल हैं। गोपियों को योग साधना की बात बेकार लगती है। उनकी मनोस्थिति उस बच्चे के समान है जिसे मनपसंद खिलौने की जगह कोई झुनझुना पकड़ा दिया गया हो। गोपियों के लिए योग साधना सिर्फ कृष्ण प्रेम ही है। सूरदास जी गोपियों के माध्यम से कहते हैं कि प्रेम एक ऐसी बीमारी है जिसे उन्होंने न कभी सुना है और न ही देखा है। गोपियों का दृष्टिकोण एकदम स्पष्ट है कि प्रेम-बंधन में बंधे हृदय पर किसी उपदेश का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। चाहे वे उपदेश अपने ही प्रिय के द्वारा क्यों न दिए गए हों। यही कारण है कि अपने ही प्रिय श्रीकृष्ण के द्वारा भेजा गया योग-संदेश उनको प्रभावित नहीं कर सका।
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