(क) ‘रति’ किस रस का स्थायी भाव है?
(ख) ‘करुण’ रस का स्थायी भाव क्या है?
(ग) ‘हास्य’ रस का एक उदाहरण लिखिए|
(घ) निम्नलिखित पंक्तियों में रस पहचान कर लिखिए:
मैं सत्य कहता हूँ सखे! सुकुमार मत जानो मुझे,
यमराज से भी युद्ध को प्रस्तुत सदा मानो मुझो|
(क) श्रृंगार रस।
श्रृंगार रस का स्थाई भाव रति होता है | श्रृंगार रस में नायक और नायिका के मन में संस्कार रूप में स्थित रति या प्रेम जब रस कि अवस्था में पहुँच जाता है तो वह श्रंगार रस कहलाता है| इसके अंतर्गत सौन्दर्य, प्रकृति, सुन्दर वन, वसंत ऋतु, पक्षियों का चहचहाना आदि के बारे में वर्णन किया जाता है।
(ख) शोक, करुण रस का स्थायी भाव शोक होता है। इस रस में किसी अपने का विनाश या अपने का वियोग, द्रव्यनाश एवं प्रेमी से सदैव बिछड़ जाने या दूर चले जाने से जो दुःख या वेदना उत्पन्न होती है उसे करुण रस कहते हैं यधपि वियोग श्रंगार रस में भी दुःख का अनुभव होता है लेकिन वहाँ पर दूर जाने वाले से पुनः मिलन कि आशा बंधी रहती है।
(ग) हास्य रस का उदाहरण—
हाथी जैसा देह, गेंडे जैसी चाल।
तरबूज़े सी खोपड़ी, खरबूज़े से गाल।।
(घ) इस पंक्ति में वीर रस का भाव है। जब किसी रचना या वाक्य आदि से वीरता जैसे स्थायी भाव की उत्पत्ति होती है, तो उसे वीर रस कहा जाता है| दिए गए वाक्य में भी युद्ध के बारे में बात की जा रही है इसीलिये इसमें वीर रस है|
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