निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर प्रत्येक लगभग 20 शब्दों में लिखिए:
(क) जयशंकर प्रसाद के जीवन के कौन से अनुभव उन्हें आत्मकथा लिखने से रोकते हैं?
(ख) बादलों की गर्जना का आह्वान कवि क्यों करना चाहता है? ‘उत्साह’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए|
(ग) ‘कन्यादान’ कविता में व्यक्त किन्हीं दो सामाजिक कुरीतियों का उल्लेख कीजिए|
(घ) संगतकार की हिचकती आवाज उसकी विफलता क्यों नहीं है?
(क) जयशंकर प्रसाद अपनी आत्मकथा लिखने से बच रह थे। उन्हें लगता था कि उनका जीवन साधारण है। इसमें कुछ भी ऐसा नहीं है जिससे लोगों को किसी प्रकार की प्रसन्नता हो सके। उनका जीवन अभावों से भरा हुआ था जिन्हें वो किसी और से बांटना नहीं चाहते थे। उनके मन में किसी के प्रति कोमल भाव और अपनी निजी भावनाओं को वे किसी अन्य के सामने नहीं रखना चाहते थे| इन्हीं सब कारणों से वे अपनी आत्मकथा नहीं लिखना चाहते थे|
(ख) इस कविता में कवि ने बादल के बारे में लिखा है। कवि बादलों से गरजने का आह्वान करता है। कवि बादल से गरजने के लिए कहता है क्योंकि गर्जना विद्रोह का प्रतीक होती है और इसीलिये कवि बादलों को गरजने के लिए कहते हैं| कवि इस कविता के माध्यम से नूतन क्रांति का आह्यान करना चाहता है|
(ग) कन्यादान कविता में कई सामाजिक कुरीतियों को दर्शाया गया है। इसमें दहेज प्रथा और घरेलू शोषण जैसी कुरीतियों पर कवि ने कन्यादान कविता के माध्यम से मुख्य रूप से प्रहार करने की कोशिश की है| कवि कविता में बताते हैं कि एक मां अपनी बेटी से कह रही है की आग की भट्टी खाना पकाने के लिए है जलने के लिए नहीं क्योंकि अक्सर नवविवाहिता को दहेज के कारण भट्टी में जला दिया जाता है या फिर आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाती है। इन्हीं सब कुरीतियों को कवि इस कविता के माध्यम से समाज के सामने रखना चाहता है और उन पर प्रहार करना चाहता है|
(घ) संगीत के प्रदर्शन के दौरान संगतकार की आवाज हमेशा दबी हुई होती है। ज्यादातर लोग इसे उसकी कमजोरी मान लेते होंगे लेकिन ऐसा नहीं है। वह तो गायक की आवाज को प्रखर बनाने के लिए त्याग करता है और जानबूझकर अपनी आवाज को दबा लेता है। संगतकार उस अभिन्न सहारे की तरह काम करता है जिसकी जरूरत गायक को हमेशा पड़ती है। सही समय पर सही सुर लगाकर संगतकार एक तरह से गायक को क्लू देता है ताकि उसके आगे वह अपनी गायकी की निरंतरता को बनाए रख सके। संगतकार स्वयं को आगे न बढ़ाकर दूसरों को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत होता है| इन सब तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में हम कह सकते हैं कि संगतकार की हिचकती आवाज उसकी विफलता नहीं है|
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