“आज आपकी रिपोर्ट छाप दूँ तो कल ही अखबार बंद हो जाए”–स्वतंत्रता संग्राम के दौर में समाचार-पत्रों के इस रवैये पर ‘एही ठैयां झुलनी हेरानी हो रामा’ के आधार पर जीवन-मूल्यों की दृष्टि से लगभग 150 शब्दों में चर्चा कीजिए|
अथवा
‘मैं क्यों लिखता हूँ’, पाठ के आधार पर बताइए कि विज्ञान के दुरुपयोग से किन मानवीय मूल्यों की क्षति होती है? इसके लिए हम क्या कर सकते हैं?
दिए गए कथन ”आज आपकी रिपोर्ट छाप दूँ तो कल ही अखबार बंद हो जाए” में एक रिपोर्ट को अखबार में छापने के बाद अखबार पर आने वाली गंभीर समस्या की बात की जा रही है| यहाँ अखबार से संबंधित लोग अंग्रेज सरकार से डरते हैं| उन्हें पत्रकारिता के सिद्धांतों जिनके अनुसार अखबार को हर हाल और परिस्थिति में सच कहना चाहिए चाहे अखबार बंद ही क्यों न हो जाए लेकिन यहाँ अख़बार में सच छापने का डर दीखता है कि कहीं अंग्रेज अखबार को बाद न कर दें| यहाँ अंग्रेजों का पत्रकारों के प्रति डर हावी है साथ ही पत्रकार पत्रकारिता के धर्म को भी भूल गए और सिर्फ अपने स्वार्थ को प्राथमिकता दे रहें ताकि हर हाल में उनका अखबार चलता रहे| उन्होंने अंग्रेजों की गुलामी और जुल्म को स्वीकार कर लिया और अब वे उसके विरोध में अपनी आवाज मुखर करने से भी भयभीत हैं| जबकि एही ठैयां झुलनी हेरानी हो रामा के पात्रों दुलारी एवं टुन्नू ने अंग्रेजों द्वारा किये जाने वाले जुल्मों के वावजूद विरोध करने का फैसला किया है और वे अपने लिए आजादी की माँग करते हैं| दोनों ही पात्र कमजोर प्रष्ठभूमि के हैं लेकिन वे फिर भी देश की आजादी की लड़ाई में शामिल हैं जबकि सशक्त लोग जैसे पत्रकार डरे हुए हैं| इन्हीं सब कारणों से हमें आजादी मिलने में इतना अधिक समय लगा अगर पहले ही लोग एक हो गए होते तो हमें यह आजादी बहुत पहले ही मिल जाती|
अथवा
आज विज्ञान का दुरुपयोग कई तरह से हो रहा है। दुनिया के अग्रणी देश जीवाश्म ईंधनो का बढ़—चढ़कर उपयोग कर रहे हैं जिससे हमारा पर्यावरण धीरे-धीरे विनाश की ओर बढ़ रहा है। कई वैज्ञानिक आज इंसानों के क्लोन बनाने की बात कर रहे हैं। कई देश एक से बढ़कर एक जैविक हथियार तैयार कर रहे हैं। खुद को शक्तिशाली बनाने के लिए कई राष्ट्रों ने मिसाइल और परमाणु बम का भी निर्माण कर लिया है। ये बम अगर किसी देश पर गिरा दिए जाएं तो सैकड़ों वर्ष तक वहां मनुष्य पैदा नहीं होंगे।ये हथियार एवं समय-समय पर नई-नई तकनीकों का उपयोग सम्पूर्ण पृथ्वी को बंजर बना देगा। खुद को अधिक शक्तिशाली बनाने की होड़ में देश और वहां के लोग एक—दूसरे के प्रति प्रेम को भूलते जा रहे हैं। विज्ञान का दुरुपयोग रोकने के लिए सबसे पहले खुद से शुरुआत करनी चाहिए। अपने घर—परिवार के सदस्यों को इसके बारे में जागरू करना चाहिए। उसके बाद मैं अपने समाज में जागरूकता फैलाने से भी विज्ञान के दुरुपयोग को रोका जा सकता है। अगर विज्ञान का दुरूपयोग नहीं रोका गया तो यह मानव सभ्यता को पतन की ओर ले जाएगा इस बात में कोई शक नहीं है| अतः हमें विज्ञान का उपयोग उन गतिविधियों तक ही सीमित रखना चाहिए जो जीवन के लिए आवश्यक हों और जिनसे पृथ्वी पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव न्यूनतम हों आसान भाषा में कहें तो हमें विज्ञान के गैर जरूरी उपयोग से बचना चाहिए|
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