निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिएः
(क) शेख अयाज़ के पिता भोजन छोड़कर क्यों उठ खड़े हुए ? ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ पाठ के आधार पर लिखिए।
(ख) शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है ? ‘पतझर में टूटी पत्तियाँ’ पाठ के आधार पर लिखिए।
(ग) ‘कारतूस’ पाठ में सआदत अली को किस प्रकार का व्यक्ति बताया गया है ?
(क) शेख अयाज के पिता दयालु और परोपकारी व्यक्ति थे। वे किसी के साथ अन्याय होता नहीं देख सकते थे। एक बार वो भोजन छोड़कर उठ खड़े हुए। उनकी पत्नी ने इसका कारण पूछा तो वे बोले कि आज उनसे एक पाप हो गया है। उन्होंने एक च्योंटे को बेघर कर दिया है। यह च्योंटा उनकी बांह पर चढ़कर यहां चला आया है। वे उसे उसके घर यानी कुएं तक छोड़ने के लिए चल पड़े।
(ख) शुद्ध सोना बहुत कीमती होता है। ताँबे के साथ मिलकर यह ताँबे के महत्व को बढ़ा देता है। दूसरी ओर ताँबा सोने की कीमत को घटा देता है। शुद्ध आदर्श जब व्यावहारिकता के साथ मिलता है तो इससे व्यावहारिकता की कीमत बढ़ जाती है। लेकिन व्यावहारिकता सिर्फ तांबे समान होती है। उसका अपना कोई महत्व नहीं होता। इसलिए शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से की गई है।
(ग) सआदत अली आसिफउद्दौला का भाई था, लेकिन अपने भाई का दुश्मन भी था। आसिफउद्दौला का कोई वारिस नहीं होता तो सआदत अली गद्दी पर बैठ सकता था। लेकिन वजीर अली के जन्म लेने से उसकी इस उम्मीद पर पानी फिर गया था। इसलिए वजीर अली की पैदाइश को वह अपनी मौत समझ रहा था। इससे पता चलता है कि सआदत अली एक लालची व्यक्ति था। वह अवध की गद्दी पर बैठने के लालच में अंग्रेजों से मिल गया था।
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