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क). बिहारी के दोहे के आधार पर लिखिए कि माला जपने और तिलक लगाने से क्या होता है| ईश्वर किससे प्रसन्न रहते हैं?

ख). ‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है?


ग). ‘आत्मत्राण’ कविता में कोई सहायक न मिलने पर कवि की क्या प्रार्थना है ?

क) लेखक कहता है कि आडम्बर और ढ़ोंग किसी काम के नहीं होते हैं। मन तो काँच की तरह क्षण भंगुर होता है जो व्यर्थ में ही नाचता रहता है। माला जपने से, माथे पर तिलक लगाने से या हजार बार राम राम लिखने से कुछ नहीं होता है। इन सबके बदले यदि सच्चे मन से प्रभु की आराधना की जाए तो वह ज्यादा सार्थक होता है।


ख) कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा इसलिए दी है क्योंकि समाज में एकता और भाईचारा कायम रहे। इससे मनुष्यों के बीच ईर्ष्या और द्वेष की भावना का अंत होगा। साथ चलने से हम आने वाली विपत्तियों को आसानी से पार कर लेंगे। व्यक्ति को अपने बारे में सोचने से ज्यादा दूसरों के हित के बारे में सोचना चाहिए।


ग) कवि सहायक के मिलने पर प्रार्थना करता है कि उसका बल पौरुष हिले, वह सदा बना रहे और कोई भी कष्ट वह धैर्य से सह ले। वह भगवान को किसी भी काम के लिए परेशान नहीं करना चाहता अपितु स्वयं हर चीज का सामना करना चाहता है।


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जापान में मानसिक रोग के क्या कारण बताए गए हैं? उससे होने वाले प्रभाव का उल्लेख करते हुए लिखिए कि इसमें ‘टी सेरेमनी’ की क्या उपयोगिता है।

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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

असल में दोनों काल मिथ्या हैं । एक चला गया है, दूसरा आया नहीं है। हमारे सामने जो बर्तमान क्षण है, वही सत्य है। उसी में जीना चाहिए। चाय पीते-पीते उस दिन मेरे दिमाग से भूत और भविष्य दोनों काल उड़ गए थे। केबल वर्तमान क्षण सामने था। और वह अनंत काल जितना विस्तृत था।


क) गद्यांश में किन दो कालों के बारे में बात की गई है और उनकी क्या विशेषता है ?


ख) लेखक ने किस काल को सत्य माना है और क्यों ?


ग) गद्यांश से लेखक क्या समझाना चाहता है?

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‘कर चले हम फिदा’- कविता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए उसका प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए।

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पढ़ाई में तेज़ होने पर भी कक्षा में दो बार फेल हो जाने पर टोपी के साथ घर पर या विद्यालय में जो व्यवहार हुआ उस पर माननीव-मूल्यों की दृष्टि से टिप्पणी कीजिए।