निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-
फिल्म निर्माता के रूप में शैलेंद्र की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
शैलेंद्र एक मानवतावादी फिल्म निर्माता थे। कवि शैलेंद्र व्यावसायिक दृष्टि से अच्छे निर्माता नहीं थे क्योंकि वे मूल रूप से एक कवि थे। कवि शैलेंद्र की ‘तीसरी कसम’ फिल्म निर्माता के रूप में पहली और अंतिम फिल्म थी। उन्होंने इस फिल्म का निर्माण पैसा कमाने के उद्देश्य से नहीं किया था क्योंकि वे एक आदर्शवादी भावुक कवि थे और आत्म-संतुष्टि के लिए फिल्म बनाकर साहसी फिल्म निर्माता होने का परिचय देना चाहते थे| शैलेंद्र ने तीसरी कसम फिल्म का निर्माण पूरी तरह साहित्यिकता के अनुसार करने का निर्णय लिया| उसके साथ शत-प्रतिशत न्याय करके अपने आदर्शवादी व्यक्तित्व को सहेज के रखा। वे चाहते तो इसमें फेर-बदल करके उसे अधिक मनोरंजक बना सकते थे। उन्होंने फिल्म उद्यांग में रहते हुए भी अपनी आदमियत नहीं खोई उन्होंने फिल्म के असफल होने के डर से घबराकर सिद्धांतों के साथ कोई समझोता नहीं किया। इस प्रकार वे एक आदर्शवादी एवं मानवतावादी फिल्म निर्माता के रूप में उभरकर आगे आए।
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