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इस पाठ में आए निम्नलिखित वाक्यों की संरचना पर ध्यान दीजिए-

(क) ‘तीसरी कसम’ फिल्म नहीं, सैल्यूलाइड पर लिखी कविता थी।


(ख) उन्होंने ऐसी फिल्म बनाई थी जिसे सच्चा कवि-हृदय ही बना सकता था।


(ग) फिल्म कब आई, कब चली गई, मालूम ही नहीं पड़ा।


(घ) खालिस देहाती भुच्च गाड़ीवान जो सि़र्फ दिल की जुबान समझता है, दिमाग की नहीं।

(क) उपर्युक्त वाक्य में ‘पर के प्रयोग से वाक्य की संरचना की गई है। ऐसा जटिल संयोजन है जैसे कि तत्त्व और उनके मिश्रण से वाक्य को बनाने का भाव पूर्ण होता है एवं यह संरचना वाक्य को अर्थ देती है।


(ख) उपर्युक्त वाक्य में ‘जिसे के प्रयोग से वाक्य की संरचना की गई है। ऐसा जटिल संयोजन है जैसे कि तत्त्व और उनके मिश्रण से वाक्य को बनाने का भाव पूर्ण होता है एवं यह संरचना वाक्य को अर्थ देती है।


(ग) उपर्युक्त वाक्य में ‘कब के प्रयोग से वाक्य की संरचना की गई है। ऐसा जटिल संयोजन है जैसे कि तत्त्व और उनके मिश्रण से वाक्य को बनाने का भाव पूर्ण होता है एवं यह संरचना वाक्य को अर्थ देती है।


(घ) उपर्युक्त वाक्य में ‘जो के प्रयोग से वाक्य की संरचना की गई है। ऐसा जटिल संयोजन है जैसे कि तत्त्व और उनके मिश्रण से वाक्य को बनाने का भाव पूर्ण होता है एवं यह संरचना वाक्य को अर्थ देती है।


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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-

उनके गीत भाव-प्रवण थे-दुरूह नहीं।

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पाठ में आए ‘से’ के विभिन्न प्रयोगों से वाक्य की संरचना को समझिए।

(क) राजकपूर ने एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेंद्र को फिल्म की असफलता के खतरों से आगाह भी किया।


(ख) रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ।


(ग) फिल्म इंडस्ट्री में रहते हुए भी वहाँ के तौर-तरीकों से नावाकिपफ़ थे।


(घ) दरअसल इस फिल्म की संवेदना किसी दौ से चार बनाने के गणित जाननेवाले की समझ से परे थी।


(ड,) शैलेंद्र राजकपूर की इस याराना दोस्ती से परिचित तो थे।

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पाठ में आए निम्नलिखित मुहावरों से वाक्य बनाइए-

चेहरा मुरझाना, चक्कर खा जाना, दो से चार बनाना, आँखों से बोलना।

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निम्नलिखित शब्दों के हिंदी पर्याय दीजिए-