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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-

उनके गीत भाव-प्रवण थे-दुरूह नहीं।

लेखक का आशय यह है कि कवि एवं गीतकार शैलेंद्र के गीतों में भाव प्रवणता बहुत थी लेकिन वह कठिन नहीं थे। उनके गीतों में भावनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति होती थी। गहरी से गहरी भावनाओं को भी बड़ी सरलता से प्रस्तुत किया जाता था। उनके गीत भावनात्मक होते हुए भी सरल थे। सामान्य से सामान्य श्रोता और दर्शक भी उनके गीतों के भाव को बड़ी आसानी से समझ लेता था। उनके गीत भावनाओं से परिपूर्ण होते हुए भी आम आदमी से जुड़े हुए थे।


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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-

व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है।

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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-

दरअसल इस फिल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने वाले की समझ से परे है।

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पाठ में आए ‘से’ के विभिन्न प्रयोगों से वाक्य की संरचना को समझिए।

(क) राजकपूर ने एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेंद्र को फिल्म की असफलता के खतरों से आगाह भी किया।


(ख) रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ।


(ग) फिल्म इंडस्ट्री में रहते हुए भी वहाँ के तौर-तरीकों से नावाकिपफ़ थे।


(घ) दरअसल इस फिल्म की संवेदना किसी दौ से चार बनाने के गणित जाननेवाले की समझ से परे थी।


(ड,) शैलेंद्र राजकपूर की इस याराना दोस्ती से परिचित तो थे।

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इस पाठ में आए निम्नलिखित वाक्यों की संरचना पर ध्यान दीजिए-

(क) ‘तीसरी कसम’ फिल्म नहीं, सैल्यूलाइड पर लिखी कविता थी।


(ख) उन्होंने ऐसी फिल्म बनाई थी जिसे सच्चा कवि-हृदय ही बना सकता था।


(ग) फिल्म कब आई, कब चली गई, मालूम ही नहीं पड़ा।


(घ) खालिस देहाती भुच्च गाड़ीवान जो सि़र्फ दिल की जुबान समझता है, दिमाग की नहीं।