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हमारे खान-पान, रहन-सहन और कपड़ों में भी बदलाव आ रहा है। इस बदलाव के पक्ष-विपक्ष में बातचीत कीजिए और बातचीत के आधार पर लेख तैयार कीजिए।

पिछले कुछ समय में हमारे खान-पान और रहन-सहन में बड़ा बदलाव आया है। यहां तक कि हमारी बोल-चाल और पहनने-ओढ़ने के तरीके भी काफी प्रभावित हुए हैं। इस बारे में लोगों से बातचीत करने पर पता चलता है कि उन्होंने अपनी जीवनशैली को जरूरतों के हिसाब से बदल लिया है। कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि इस तरह के परिवर्तन को स्वीकार करने के बाद समाज में उनका रुतबा पहले से ज्यादा बेहतर हुआ है। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि इस तरह के आए बदलावों ने हमारी संस्कृति को काफी नुकसान पहुंचाया है।


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मशीनी युग में अनेक परिवर्तन आए दिन होते रहते हैं। आप अपने आस-पास से इस प्रकार के किसी परिवर्तन का उदाहरण चुनिए और उसके बारे में लिखिए।

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बाजार में बिकने वाले सामानों की डिज़ाइनों में हमेशा परिवर्तन होता रहता है। आप इन परिवर्तनों को किस प्रकार देखते हैं? आपस में चर्चा कीजिए।

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बदलू को किसी बात से चिढ़ थी तो काँच की चूडि़यों से और बदलू स्वयं कहता है- ‘‘जो सुंदरता काँच की चूडि़यों में होती है, लाख में कहाँ संभव है?’’ ये पंक्तियाँ बदलू की दो प्रकार की मनोदशाओं को सामने लाती हैं। दूसरी पंक्ति में उसके मन की पीड़ा है। उसमें व्यंग्य भी है। हारे हुए मन से, या दुखी मन से अथवा व्यंग्य में बोले गये वाक्यों के अर्थ सामान्य नहीं होते।

कुछ व्यंग्य वाक्यों के अर्थ सामान्य नहीं होते। कुछ व्यंग्य वाक्यों को ध्यानपूर्वक समझकर एकत्र कीजिए और उनके भीतरी अर्थ की व्याख्या करके लिखिए।


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बदलू कहानी की दृष्टि से पात्र है और भाषा की बात (व्याकरण) की दृष्टि से संज्ञा है। किसी भी व्यक्ति, स्थान, वस्तु, विचार तथा भाव को संज्ञा कहते हैं। संज्ञा को तीन भेदों में बाँटा गया है- (क) व्यक्तिवाचक संज्ञा, जैसे-लला, रज्जों, आम, काँच, गाय इत्यादि। (ख) जातिवाचक संज्ञा, जैसे- चरित्र, स्वाभाव, वज़न, आकार आदि द्वारा जानी जाने वाली संज्ञा_ (ग) भाववाचक संज्ञा,

जैसे- सुंदरता, नाज़ुक, प्रसन्नता इत्यादि जिसमें कोई व्यक्ति नहीं है और न आकार या वजन, परंतु उसका अनुभव होता है। पाठ से तीनों प्रकार की संज्ञाएँ चुनकर लिखिए।