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‘‘मैं हर पेड़ को अपना दुश्मन क्यों समझ रहा था।’’

लेखक पेड़ों को दुश्मन क्यों समझ रहा था?


लेखक जिस बस में बैठा था उसकी हालत बहुत खराब थी। बस की खिड़की के शीशे टूटे हुए थे। लेखकर खिड़की की ओर बैठा था। जब भी कोई पेड़ आता तो लेखक को लगता कि अब ये पड़ खिड़की से टकराएगा। वो निकल जाता दो दूसरे पेड़ का इंतजार होता। अगर पेड़ खिड़की से टकरा जाता तो लेखक को गहरी चोट भी लग सकती थी। इस वजह से वह पेड़ों को अपना दुश्मन समझ रहा था।


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