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अनुमान कीजिए यदि बस जीवित प्राणी होती, बोल सकती तो वह अपनी बुरी हालत और भारी बोझ के कष्ट को किन शब्दों में व्यक्त करती? लिखिए।

यदि बस एक जीवित प्राणी तो अपनी हालत को देखकर खुद पर तरस खाती। फिर कहती कि मैं अब बूढ़ी हो चली हूं। मेरे हाथ पैर और आंखों ने काम करना बंद कर दिया। करीब 30 साल पहले मैं जवान थी। मेरा ड्रावर मुझे नई नवेली दुल्हन की तरह सजाकर रखता था। मुझ पर फूल माला चढ़ाता था। मेरी अच्छे से साफ सफाई करता था। तब मैं काम भी ज्यादा और अच्छे से कर पाती थी। मैं नई थी इसलिए दिन रात काम करने के बाद भी थकती नहीं थी। इन 30 सालों में ना जाने कितने ड्राइवर बदल गए। सवारियों ने भी मेरा ध्यान नहीं रखा। सवारी खुद मेरी सीट को खराब करके चली जाती थीं। शायद वो ये भूल जाती थीं कि मैंने ही उन्हें उनके गंतव्य तक पहुंचाया है। ये नया ड्राइवर सिर्फ पैसे कमाना जानता है। ये मेरा बिल्कुल ख्याल नहीं रखता। मेरी सीट पर खाना खाता है और फिर वैसा ही छोड़ चल देता है। ध्यान ना देने की वजह से मेरी हालत दिन पर दिन खराब होती जा रही है।


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सविनय अवज्ञा का उपयोग व्यंग्यकार ने किस रूप में किया है? लिखिए।

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आप अपनी किसी यात्रा के खट्ठे-मीठे अनुभवों को याद करते हुए एक लेख लिखिए।

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बस, वश, बस’ तीन शब्द हैं। इनमें से ‘बस’ सवारी के अर्थ में, ‘वश’ अधीनता के अर्थ में, और ‘बस’ पर्याप्त(काफ़ी) के अर्थ में प्रयुक्त होता है_ जैसे-बस से चलना होगा। मेरे वश में नही है। अब बस करो।

उपर्युक्त वाक्यों के समान वश और बस शब्द से दो-दो वाक्य बनाइए।


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‘‘हम पाँच मित्रों ने तय किया कि शाम चार बजे की बस से चलें। पन्ना से इसी कंपनी की बस सतना के लिए घंटे भर बाद मिलती है।’’

ऊपर दिए गए वाक्यों मे ने, की, से आदि वाक्य के दो शब्दों के बीच संबंध स्थापित कर रहे हैं। ऐसे शब्दों को कारक कहते हैं। इसी तरह दो वाक्यों को एक साथ जोड़ने के लिए ‘कि’ का प्रयोग होता है।


कहानी में से दोनों प्रकार के चार वाक्यों को चुनिए।