स्वरोजगार-प्रगति की ओर
•प्रस्तावना
•भारतीय अर्थव्यवस्था
•समय की माँग
•युवा प्रतिभा को निखरने का मौका
•उपसंहार
उपसंहार- स्वावलंबी बनना प्रत्येक युवा का सपना होता है। युवावस्था की शुरुआत होते ही उसमें आत्म निर्भर बनने की चाहत गहरी होती चली जाती है। महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले प्रायः सभी छात्र/छात्राएँ आत्म निर्भर बनना चाहते हैं। वे कुछ ऐसा करना चाहते हैं, जिससे वे समाज व परिवार में स्वयं की सार्थकता व उपयोगिता साबित कर सके, अपनी पहचान बना सकें|
भारतीय अर्थव्यवस्था- आज के इस दौर में युवाओं के लिए इस चाहत को पूरा करना इतना आसान नहीं है क्योंकि सरकारी नौकरियाँ अब सिमटती जा रही हैं और साथ ही युवाओं की संख्या बढ़ने के कारण रोजगार की माँग लगातार बढ़ती जा रही है। गैर-सरकारी तंत्र में रोजगार के अवसर तो बढ़े हैं, पर साथ ही कई अनुबन्ध एवं प्रतिबन्ध भी बढ़े हैं। आज स्थिति कुछ ऐसी हो गई है की योग्यता एवं प्रतिभा को नौकरी और रोजगार की गारंटी नहीं माना जा सकता। रही बात स्वरोजगार की तो उसके लिए धन चाहिए और यह सुविधा सब के पास उपलब्ध नहीं है। सरकारी ऋण भी कुछ भाग्यशालियों को मिल पाता है। अन्यथा ज्यादातर युवा तो इसे पाने की कोशिश में सरकारी दफ्तरों में चक्कर लगाते और अंत में हाथ मलते रह जाते हैं| संक्षेप में कहें तो भारतीय अर्थव्यवस्था में स्वरोजगार के अवसर तो बड़ी संख्या में मौजूद हैं लेकिन स्वरोजगार की स्थापना के लिए वातावरण उतना सहायक नहीं है|
समय की माँग- आज आवश्यकता इस बात की है की समस्याओं के मूल कारणों की खोज की जाए और इनके निदान हेतु सार्थक प्रयास किये जाए साथ ही युवा को इन समस्याओं को हल करने हेतु प्रेरित एवं तैयार किया जाये| युवाओं को आवश्यक व्यवसायिक शिक्षा प्रदान की जाए जिससे वे स्वरोजगार की स्थापना एवं उसे आगे ले जाने में सक्षम हो सकें| इस दिशा में सरकार कई योजनओं के माध्यम से निरंतर प्रयासरत है साथ ही समाज को भी इस दिशा में प्रयास करना चाहिए|
युवा प्रतिभा को निखरने का मौका- सभी बड़े शहरों में रोजगार कार्यालय खोले गए हैं जिनके माध्यम से युवाओं को रोजगार की सुविधा प्रदान की जाती है| वर्तमान समय में सरकार इस बात पर अधिक बल दे रही है कि देश के सभी युवक स्वावलंबी बनें| वे सिर्फ सरकारी सेवाओं पर ही आश्रित न रहें अपितु उपयुक्त तकनीकी अथवा व्यवसायिक शिक्षा ग्रहण कर स्वरोजगार हेतु प्रयास करें, इस कार्य हेतु सरकार उचित प्रशिक्षण देने में भी सहयोग कर रही है|
उपसंहार- देश के युवा मिलकर देश व समाज के नविनर्माण के कार्यों को अपने स्वावलम्बन का अवसर बना लें तो न केवल उन्हें आत्मिनर्भरता मिलेगी, बल्कि इसके साथ एक शसक्त राष्ट्र एवं बेहतर समाज का निर्माण भी होगा| साथ ही युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने से देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी|
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