‘बड़े भाई साहब’ कहानी के आधार पर लगभग 100 शब्दों में लिखिए कि लेखक ने समूची शिक्षा प्रणाली के किन पहलुओं पर व्यंग्य किया है? आपके विचारों से इसका क्या समाधान हो सकता है? तर्कपूर्ण उत्तर लिखिए|
अथवा
‘अब कहाँ दूसरों के दुख से दुखी होने वाले’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि बढ़ती हुई आबादी का पशुपक्षियों और मनुष्यों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है? इसका समाधान क्या हो सकता है? उत्तर लगभग 100 शब्दों में दीजिए|
‘बड़े भाई साहब’ पाठ में लेखक ने शिक्षा के विभिन्न तौर तरीकों पर व्यंग्य किया है। लेखक के अनुसार, आजकल विद्यार्थियों को जो कुछ भी पढ़ाया जा रहा है उससे उनके वास्तविक जीवन का कोई लेना देना नहीं है। इसे पढ़कर वे सिर्फ नौकरी प्राप्त करने और आजीविका कमाने के काबिल बनते हैं| परंतु वर्तमान शिक्षा प्रणाली में विद्यार्थी संस्कार, नीतियों और परंपराओं से बहुत पीछे छूट जाता है| वह शिक्षा सिर्फ आजीविका ग्रहण करने के लिय लेता है जबकि शिक्षा का मूल उद्देश्य अध्ययन और ज्ञान ग्रहण करना होता था जिसके माध्यम से व्यक्ति जीवन के मूल्यों और उसे जीने के तरीकों को सीखता है| वर्तमान शिक्षा प्रणाली में कुच्छ बदलाव करने की आवश्यकता है| शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिससे व्यक्ति न सिर्फ आजीविका ग्रहण करने में सक्षम बने बल्कि मानवीय मूल्य मूल्यों को ग्रहण करे ताकि एक बेहतर समाज व राष्ट्र का निर्माण किया जा सके|
अथवा
बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ा है। बढ़ती हुई आबादी ने समन्दर को पीछे धकेल दिया है और पेड़ों को अपने रास्ते से हटा दिया है। इससे कितने ही पशु पक्षी घर से बेघर हो गए हैं। अब इसके कारण मौसम में अजीबोगरीब बदलाव हो रहे हैं। कहीं सूखा पड़ रहा है तो कहीं बाढ़ आ रही है। पर्यावरण का संतुलन बुरी तरह से बिगड़ चुका है। नेचर हमारी गलतियों को बहुत हद तक बर्दाश्त करता है। लेकिन जब हम वो हदें पार कर जाते हैं तो फिर नेचर अपना गुस्सा दिखाता है। इस समस्या के समाधान के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा वृक्ष लगाने चाहिए। आबादी ना बढ़े इसके लिए परिवार नियोजन को बढ़ावा देना होगा तभी मानव और पशु—पक्षी सुरक्षित रह पाएंगे।
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