‘कर चले हम फ़िदा’ अथवा ‘मनुष्यता’ कविता का प्रतिपद्य लगभग 100 शब्दों में लिखिए|
कर चले हम फिदा, यह गाना देश के वीर जवानों को समर्पित है। यह गाना कवि ने तब लिखा था जब भारत—चीन का युद्ध हुआ था और इसमें देश की सीमा पर लड़ रहे सैकड़ों जवान शहीद हो गए थे। इसमें कवि शहीदों की ओर से देश के युवाओं को संदेश पहुंचाता देना चाहता है। कवि सैनिकों के माध्यम से कहता है कि हे मेरे देश के युवाओं जब तक हम में जान थी तब तक हम इस देश के लिए लड़े। अब हम शहीद हो रहे हैं। अब इस धरती माता की रक्षा का जिम्मा तुम पर है। शहीद को पूरी उम्मीद है कि अगली पीढ़ी भी देश की वैसी ही हिफाजत करेगी जैसी हमने की है। सैनिक कहता है सीमा पर अपने खून से लक्ष्मण रेखा खींच देनी चाहिए ताकि उसे लाँघकर कोई भी रावण अंदर नहीं आ सके। इस गाने के पूरे संदेश को देखा जाए तो यह वीर रस और करुण रस का मिला जुला रूप है और इसके माध्यम से हमारे सैनिकों की राष्ट्र भक्ति को अभिव्यक्त किया गया है|
अथवा
मनुष्यता, यह कविता मैथिलीशरण गुप्त जी की रचना है। इसमें कवि बता रहा है आज के इस समाज में मनुष्य अर्थहीन होता जा रहा है। इसकी वजह है स्वार्थ। मनुष्य भी अब पशुओं की तरह सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए जीता है। हमने दूसरों के लिए जीना छोड़ दिया है। हमें दूसरों के लिए कुछ ऐसे काम करने चाहिए कि मरने के बाद भी लोग हमें याद रखें। ऐसा करने से लोग हमें मरने के बाद भी याद रखते हैं और हम अमर हो जाते हैं। पौराणिक कथाओं में महादानियों का उल्लेख किया गया है। जैसे दधिची ने वज्र बनाने के लिए अपनी हड्डी देवताओं को दे दी थी जिससे सबका भला हो पाया। ऐसे महापुरुषों को परोपकार के कारण लोग याद रखते हैं। सभी मनुष्य भाई—भाई हैं। सबके माता पिता परम परमेश्वर हैं। कोई काम बड़ा या छोटा नहीं है। सब एक समान हैं।
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