निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 80-100 शब्दों का अनुच्छेद लिखिए|
(क) भारतीय किसान के कष्ट
● अन्नदाता की कठिनाइयां
● कठोर दिनचर्या
● सुधार के उपाय
(ख) स्वच्छता आंदोलन
● क्यों
● बदलाव
● हमारा उत्तरदायित्व
(ग) मन के हारे हार है मन के जीते जीत
● निराशा अभिशाप
● दृष्टिकोण परिवर्तन
● सकारात्मक सोच
(क) अन्नतादाता की कठिनाइयां— भारत देश किसानों का देश कहा जाता है। किसानों को तपती धूप, कड़ाके की ठंड और मूसलाधार बारिश में भी काम करना पड़ता है। पूरे दिन की मेहनत के बाद उनके हाथ चंद रुपए आते हैं। जिससे उनकी कभी पूरी नहीं हो पाती हैं। वो दूसरों को तो भोजन देते हैं लेकिन खुद अन्न के लिए तरस जाते हैं। अशिक्षा, अंधविश्वास तथा समाज में व्याप्त कुरीतियां उसके साथी हैं। सरकारी कर्मचारी और जमींदार उसका शोषण करते हैं। कभी—कभी कर्ज में दबे किसान आत्महत्या करने पर भी मजबूर हो जाते हैं।
कठोर दिनचर्या—जब किसान मिट्टी पर हल चलाता है तो बंजर जमीन भी सोना बन जाती है। देश का किसान बहुत मेहनती है। किसानों की उगाई हुई फसलों से ही पूरी मानव जाति का पेट भरता है। किसानों को अन्नदाता भी कहा है। हमारे अन्नदाता की दिनचर्या कठिन होती है। किसान ब्रह्ममुहूर्त में उठ अपने काम शुरू कर देता है। पशुओं को चारा—पानी देना और फिर खेतों पर परिश्रम करना। किसान खेतों में ही खाना खा लेते हैं। किसान देर शाम कंधे पर हल रख बैलों को हांकते हुए घर लौटता है।
सुधार के उपाय— सरकार किसानों के लिए अलग—अलग स्कीम चलाकर उन्हें सुविधाएं पहुंचाने की कोशिश करती है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद किसानों की हालत में सुधार करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की योजनाओं में मुफ्त बीज उपलब्ध करवाने से लेकर कम ब्याज दर पर ऋण मुहैया कराना तक शामिल है। उन्हें आधुनिक कृषि यंत्र भी उपलब्ध करवाए जाते हैं। सरकार को उम्मीद है कि इससे किसानों की खुशियां फिर लौटेंगी।
(ख) स्वच्छता आन्दोलन
भारत देश जो कभी किसी जमाने में सोने की चिड़िया कहा जाता था, जो कि अपने वैभव और संस्कृति के लिए जाना जाता था। उस समय भारत में हर तरह की सुविधा उपलब्ध थी और हमारा देश विकसित देशों की श्रेणी में आता था। लेकिन समय के बदलाव के चलते हमारे देश पर कई बाहरी ताकतों ने राज किया जिससे हमारी देश की हालत खराब हो गई। हमारे देश में स्वच्छता पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जाता है आपने देखा होगा कि हमारे देश का कोई भी बड़ा राज्य हो या शहर हो या फिर गांव हो या फिर कोई गली या मोहल्ला हो वहां पर भी आपको कूड़ा करकट मिलेगा।
क्यों— भारत, दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में नंबर एक पर है। इसी वजह से यहां बीमारियां फैलने का खतरा ज्यादा होता है। साथ ही पर्यटक भी प्रदूषित देशों का भ्रमण करने से कतराते हैं। इसी वजह से सरकार ने देश में स्वच्छता का आंदोलन चलाया है। गंदगी और उससे होने वाली बीमारियों के कारण अस्पतालों में भीड़ बढ़ गई है। कभी—कभी सही इलाज ना मिलने के कारण मरीज की मौत हो जाती है।
बदलाव— गंदगी अब महामारी बन गई है। देश के पिछड़े इलाकों में रहने वाले लोग इसके लिए जागरूक नहीं हैं। गंदगी के कारण ही पर्यावरण दूषित होता है और जीवनकाल भी छोटा हो गया है। स्वच्छता लाने के लिए एक क्रांति की जरूरत है। देश साफ—सुथरा होगा तो इससे आर्थिक विकास को भी सहारा मिलेगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में स्वच्छता अभियान शुरू किया था। इसका उद्देश्य शहरों ग्रामीण इलाकों, मोहल्लों और गलियों की साफ सफाई करना है।
(ग) मन के हारे हार है मन के जीते जीत
निराशा अभिशाप— मनुष्य के जीवन सुख—दुख, आशा—निराशा आना आम बात हो गई है। ये सब जीवन के रंग हैं। इनके बिना जीवन ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म जैसी हो जाएगी। महान पुरुषों ने कहा भी है कि जीवन उल्लास के साथ जीना चाहिए। निराशा एक अभिशाप है। जो मनुष्य निराश रहते हैं उन्हें मानसिक बीमारी हो जाती है। निराशा पर विजय प्राप्त करने का सबसे अच्छा तरीका है कि हमेशा खुश रहो। खुश रहने वाले मनुष्य के लिए निराशा भी छोटी पड़ जाती है।
दृष्टिकोण परिवर्तन— दृष्टिकोण परिवर्तन— मनुष्य के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता परिस्थिति को देखने का तरीका कैसा है। कभी—कभी परिस्थिति छोटी सी होती है लेकिन वो उसे सोच—सोच के बड़ा कर देता है। सारा खेल सोच का है। कभी—कभी मनुष्य के मन मुताबिक चीजें नहीं हो पाती हैं जिसकी वजह से वो निराश होता है। अगर वो इसी असफलता को सकारात्मकता से ले तो परिस्थिति मनुष्य पर हावी नहीं हो पाती। थोड़ी देर का धैर्य और शांत मन परिस्थिति को आधा खत्म कर देता है। परिस्थियां मनुष्य को तभी हराती हैं जब वो मन से कमजोर होकर उसके सामने घुटने टेक देता है।
सकारात्मक सोच— आज दुनिया में ऐसा कोई नहीं है जिसके सामने परिस्थितियां ना आएं। इसलिए उसे ये नहीं सोचना चाहिए कि ऐसा मेरे ही साथ क्यों हो रहा है। परिस्थितियां सबके जीवन में आती हैं। प्रबल भावना वाले मनुष्य के आगे परिस्थितियां कभी जीत नहीं सकतीं। मनुष्य को हमेशा आशावादी और कर्मवीर होकर रहना चाहिए। इसके लिए सकारात्मक सोच का होना बहुत जरूरी है। जो हो रहा है वो अच्छा है और जो होने वाला है वो और भी अच्छा होगा।
Couldn't generate an explanation.
Generated by AI. May contain inaccuracies — always verify with your textbook.