निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-
फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह और माया के बंधन में जकड़ा रहता है, मैं फटकार और घुड़कियाँ खाकर भी खेल-कूद का तिरस्कार न कर सकता था।
जीवन के मुश्किल समय में भी मनुष्य मोह-माया से अलग नहीं रह सकता। उसी प्रकार, लेखक को खेल कूद के सामने बड़े भाई साहब की डांट, नसीहत कुछ असर ना करती। लेखक को खूब डांट-फटकार पड़ती लेकिन इसे बावजूद भी वह खेलना ना छोड़ता। मैदान की सुखद हरियाली, वॉलीबॉल की तेजी और फुरती, फुटबॉल की उछलकूद देख छोटे भाई साहब खुद को खेलने से रोक ना पाते। समय-समय पर भाई साहब के डर से टाइम टेबल तो बन जाता लेकिन उस पर अमल ना हो पाता।
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