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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-

आँखे आसमान की ओर थीं और मन उस आकाशगामी पथिक की ओर, जो मंद गति से झूमता पतन की ओर चला आ रहा था, मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलर विरक्त मन से नए संस्कार ग्रहण करने जा रही हो।

ये पंक्तियां उस समय को दर्शाती है जब लेखक संध्या के समय एक कनकौआ लूटने बेतहाशा दौड़ा जा रहा था। उसकी आंखें तो आसमान की ओर थी और मन भी आकाश में विचरते हुए पथिक के समान था जो धीरे-धीरे पतंग की ओर बढ़ रहा था। नीचे आती पतंग पर नजर टिकाए लेखक उसी दिशा में भागा जा रहा था। उसे इधर-उधर से आने वाली किसी भी चीज की कोई खबर नहीं थी। जब अचानक बड़े भाई साहब ने उसका हाथ पकड़ लिया तो उसे होश आया लेकिन इसके बाद जमकर लेखक की फटकार पड़ी।


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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-

फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह और माया के बंधन में जकड़ा रहता है, मैं फटकार और घुड़कियाँ खाकर भी खेल-कूद का तिरस्कार न कर सकता था।

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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-

बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान कैस पायेदार बने?

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निम्नलिखित शब्दों के-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए-

नसीहत, रोष, आज़ादी, राजा, ताज्जुब

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प्रेमचंद की भाषा बहुत पैनी और मुहावरेदार है। इसीलिए इनकी कहानियाँ रोचक और प्रभावपूर्ण होती है। इस कहानी में आप देखेंगे कि हर अनुच्छेद में दो-तीन मुहावरों का प्रयोग किया गया है। उदाहरणतः इन वाक्यों को देखिए और ध्यान से पढि़ए-

मेरा जी पढ़ने में बिलकुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पड़ता था।


भाई साहब उपदेश की कला में निपुण थे। ऐसी-ऐसी लगती बातें कहते, ऐसे-ऐसे सूक्ति बाण चलाते कि मेरे जिगर के टुकड़े टुकड़े हो जाते और हिम्मत टूट जाती।


वह जानलेवा टाइम-टेबिल, वह आँखफोड़ा पुस्तकें, किसी की याद न रहती और भाई साहब को नसीहत और फ़जीहत का अवसर मिल जाता।


निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए-


सिर पर नंगी लटकना, आड़े हाथों लेना, अंधे के हाथ बटेर लगना, लोहे के चने चबाना, दाँतों पसीना आना, ऐरा-गैरा नत्थू खेरा।