विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए ‘सपनों के –से दिन’ पाठ में अपनाई गई युक्तियों को ध्यान में रखकर वर्तमान में इसके लिए संशोधित कदम उठाए गए हैं। इस विषय में अनुशासन के पालन हेतु अपने विचार प्रकट कीजिए।
अथवा
‘टोपी शुक्ला’ पाठ में इफ्फन और टोपी की मैत्री के द्वारा क्या सन्देश दिया गया है ? वर्तमान संदर्भों में उसकी उपयोगिता समझाए।
इस पाठ में विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए कठोर दंड, मानसिक प्रताड़ना और मार—पीट जैसी युक्तियां अपनाई गई हैं। इसके अलावा बच्चों के उत्साह को बढ़ाने के लिए शाबासी भी दी जाती थी। वहीं वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों को बच्चों के साथ मारपीट करने का हक नहीं दिया गया है। शिक्षकों को बाल मनोविज्ञान के बारे में पढ़ाया एवं प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वे बच्चों के मन मस्तिष्क को समझ सकें और उन्हें सही मार्गदर्शन प्रदान कर सकें| शिक्षकों परीक्षण दिया जाता है कि वे बच्चों की भावनाओं को समझें और उनके साथ दुर्व्यवहार ना करें। बच्चों को उनकी गलती का एहसास करवाएं और उनके साथ एक मित्र की तरह व्यवहार करें| ताकि बच्चे स्कूल जाने, कक्षा में भाग लेने एवं शिक्षक से सवाल पूंछने से दरें नहीं|
अथवा
इफ्फन और टोपी शुक्ला अलग-अलग मजहब के थे। इसके बावजूद दोनों पक्के दोस्त थे। उनकी दोस्ती के बीच में मजहब की दीवार नहीं आ पाई। दोनों प्रेम के अटूट बंधन में बंधे थे। इफ्फन के बिना टोपी अधूरा सा था। जब इफ्फन के पिता का तबादला हुआ तो टोपी बिल्कुल अकेला रह गया था। इसके बाद वो किसी और को अपना मित्र नहीं बना पाया| आज के समय में ऐसी निस्वार्थ दोस्ती कम ही देखने को मिलती है। अगर ऐसी दोस्ती इस जमाने में हो जाए तो इंसान का जीवन ही बदल जाए। इस स्वार्थी दुनिया में सच्चा दोस्त मिलना बहुत मुश्किल है। वर्तमान समय में ऐसे ही सच्चे और अच्छे लोगों को देश की जरूरत है।
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