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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर के सही विकल्प छांटकर लिखिए|

भारत एक स्वतंत्र धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। इस राष्ट्र में दक्षिण में स्थित कन्याकुमारी से लेकर उत्तर में कश्मीर तक विस्तृत भू भाग है। यह भू भाग अनेक राज्यों के मध्य बंटा हुआ है। यहां अनेक धर्मानुयायी तथा भाषा भाषी लोग रहते हैं। संपूर्ण राष्ट्र का एक ध्वज, एक लोकसभा, एक राष्ट्रचिन्ह तथा एक ही संविधान है। भारत की सर्वाधिक उल्लेखनीय विशेषता विविधता में एकता है। यहां पर विभिन्न धर्म, जाति तथा संप्रदाय के लोग रहते हैं। सभी लोग के रीति रिवाजों, बोली, भाषा व रहन सहन भिन्न भिन्न हैं। भौगोलिक दृष्टि से देखें तो यहां पर ऊंचे ऊंचे पहाड़ हैं तो कही समतल है। कही उपजाऊ भूमि तो कहीं रेगिस्तान। दक्षिण में हिंद महासागर लहलहाता है। आधुनिक काल में एक से एक द्रुतगामी यातायात के साधन बन चुके हैं जिससे देश की यह भौगोलकि सीमा सिकुड गई है। अब एक भाग से दूसरे भाग में हम शीघ्र ही पहुंच सकते है। सांस्कृतिक दृष्टि से देखें तो संपूर्ण देश में एक अदभुत समानता दिखाई पड़ती है। विभिन्न धर्मों के धर्मावलंबी संपूर्ण देश में पाए जाते हैं। इसके बावजूद सारा देश वस्तुतः एक ही सूत्र में बंधा है। भारतीय संस्कृति में ढले प्रत्येक व्यक्ति की अपनी पहचान हे। इस पहचान के कारण इस देश के लोग एक दूसरे से अपना भिन्न अस्तित्व रखते हैं। यह सांस्कृतिक एकता ही वस्तुतः इस देश की यह शक्ति है जिससे इतना बड़ा देश एक सूत्र में बंधा हुआ है। विविधता में एकता की इसी विशेषता पर सभी भारतीय गर्व करते है तथा इस पर संसार दंग है। राष्ट्रीय एकता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए अनेक प्रयत्न किए गए हैं। जनता में जागृति भी आई किंतु स्थायी नहीं रह पाती। चाहे स्थिति में बहुत बड़ा परिवर्तन नही आया परंतु शनैः शनैः भावनात्मक एकता का विकास हुआ। इस समय कहीं-कहीं पृथकवादी विचारधारा पनप रही है और हमें ऐसी स्थिति में प्रत्येक भारतीय को संकीर्ण विचारधारा का परित्याग कर व्यापक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। तभी हमारी राष्ट्रीय एकता अक्षुण्ण बनी रह सकती है, जो आज की एक महत्वपूर्ण अपेक्षा है।


क) राष्ट्र का निर्माण कौन सी चीजें मिलकर कर सकती हैं?


ख) भारत की उल्लेखनीय विशेषता क्या है?


ग) देश की भौगोलिक सीमा किस प्रकार सिकुड़ गई प्रतीत होती है?


घ) सांस्कृतिक दृष्टि से देश में क्या समानता दिखाई पड़ती है?


ङ) भारत में अनेकता में एकता कैसे है?


च) हमारी राष्ट्रीयता एकता कैसे अक्षुण्ण बनी रह सकती है?

(क) भारत में अलग-अलग भाषा, धर्म, रीति-रिवाज और रहन-सहन वाले लोग रहते हैं। फिर भी देश का ध्वज, राष्ट्र भाषा, राष्ट्र चिन्ह और संविधान एक है। इन्हीं चीजों से मिलकर एक राष्ट्र का निर्माण होता है।


(ख) भारत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां अनेकता में भी एकता है। देश में अलग-अलग भाषा, धर्म, रीति-रिवाज और रहन-सहन वाले लोग रहते हैं। भौगोलिक दृष्टि से देखें तो यहां कहीं पहाड़ तो कहीं समतल, कहीं रेगिस्तान तो कहीं समुद्र है। इतनी विविधता होने के बावजूद देश एक सूत्र में बंधा हुआ है।


(ग) आधुनिक काल में एक से बढ़कर एक तेज रफ्तार वाले यातायात के साधन बन चुके हैं जिससे देश की भौगोलकि सीमा सिकुड़ गई है। अब एक भाग से दूसरे भाग में हम शीघ्र ही पहुंच सकते हैं।


(घ) सांस्कृतिक दृष्टि से देखें तो संपूर्ण देश में एक अद्भुत समानता दिखाई पड़ती है। विभिन्न धर्मों के धर्मावलंबी संपूर्ण देश में पाए जाते हैं। इसके बावजूद सारा देश एक सूत्र में बंधा है। भारतीय संस्कृति में ढले प्रत्येक व्यक्ति की अपनी एक विशिष्ट पहचान है। इस पहचान के कारण देश के लोग एक दूसरे से अपना भिन्न अस्तित्व रखते हैं फिर वे वे आपस में भाईचारे के साथ रहते हैं|


(ङ) भारत की सर्वाधिक उल्लेखनीय विशेषता विविधता में एकता है। यहां पर विभिन्न धर्म, जाति तथा संप्रदाय के लोग रहते हैं। सभी लोगों के रीति रिवाजों, बोली, भाषा व रहन सहन भिन्न हैं। भौगोलिक दृष्टि से देखें तो यहां पर कहीं ऊंचे-ऊंचे पहाड़ हैं तो कहीं समतल है, कहीं उपजाऊ भूमि तो कहीं रेगिस्तान। दक्षिण में हिंद महासागर लहलहाता है। इसके बावजूद संपूर्ण राष्ट्र का एक ध्वज, एक लोकसभा, एक राष्ट्रचिन्ह तथा एक ही संविधान है।


(च) राष्ट्रीय एकता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए अनेक प्रयत्न किए गए हैं। जनता में सामाजिक एवं राजनीतिक जागृति लाई जा रही है| संभव है स्थिति में बहुत बड़ा परिवर्तन नहीं आया लेकिन समय-समय पर भावनात्मक एकता का विकास हुआ। इस समय कहीं-कहीं पृथकवादी विचारधारा पनप रही है और ऐसी स्थिति में प्रत्येक भारतीय को संकीर्ण विचारधारा को छोड़ व्यापक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए ताकि हमारे देश कि एकता को अक्षुण्ण रखा जा सके|


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निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए

जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला उस-उस राही को धन्यवाद। जीवन अस्थिर, अनजाने ही हो जाता पथ पर मेल कहीं, सीमित पग पग लंबी मंजिल तय तय कर लेना कुछ खेल नहीं, दायं बांए सुख-दुख चलते सम्मुख सम्मुख चलता पथ का प्रमाद, जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला उस-उस राही को धन्यवाद।


जो साथ न मेरा दे पाए, उनसे कब सूनी हुई डगर, मैं भी न चलूं यदि तो भी क्या राही मर लेकिन राह अगर इस पथ पर वे ही चलते हैं, जो चलने का पा गए स्वाद जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला उस उस राही को धन्यवाद।


क) कवि के अनुसार जीवन कैसा है?


ख) जीवन रूपी यात्रा में कैसे कैसे अनुभव आते हैं?


ग) मंजिल तय करना खेल क्यों नहीं है?


घ) कवि किसको धन्यवाद करता है और क्यों?

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क) उदाहरण से शब्द व पद का अंतर स्पष्ट कीजिए

ख) व्याकरण के नियमों से बंधे वाक्य में प्रयुक्त शब्द को-------कहते हैं


ग) निर्देशानुसार वाक्य रुपांतरण कीजिए


(i) कपिल ने बुलाया पर यश नहीं आया (सरल वाक्य)


(ii) कल बहुत सर्दी होने के कारण हम कहीं नहीं गए (संयुक्त वाक्य)


(iii) सदाचारी लोग सबका आदर पाते हैं (मिश्र वाक्य)

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क) निम्नलिखित शब्दों का समास विग्रह करते हुए समास का नाम लिखिए

(i) शुभागमन


(ii) वीणापाणि


ख) निम्नलिखित शब्दों को समस्त पद रूप में लिखकर समास का नाम लिखिए


(ii) जीवन से मुक्त


(ii) सात सौ (दोहों) का समाहार


ग) यदि मनुष्य मन में दृढ़ निश्चय कर ले तो वह_________सकता है।

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क) निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध रूप में लिखिए

(i) कुसंग सद्बुद्धि और विवेक का नाश करती है।


(ii) उस मकान के गिरने की आशा है।


(iii) उसने आने के लिए बोला था।


(iv) सभी नेताओं ने जोशीला भाषण दिया था|


ख) सन्नाटे में होना मुहावरे का अर्थ लिखकर वाक्य बनाइए।