‘मट्टी से मिट्टी मिले’ का आशय स्पष्ट कीजिए?
लेखक निदा फाजली के पाठ अब कहां दूसरे के दुख से दुखी होने वाले से ली गई पंक्ति मिट्टी से मिट्टी मिले का अर्थ है कि ये संसार नश्वर है। मनुष्य खुद पर घमंड करता फिरता है लेकिन अंत में उसे इसी मिट्टी में मिल जाना है। जीवनभर बड़ी-बड़ी बातें करने वाले मनुष्य का अस्तित्व एक पल में समाप्त हो जाता है। ये शरीर मिट्टी का है और मिट्टी में ही मिल जाना है। पहचानना भी कठिन हो जाता है कि यह किसकी मिट्टी है। लेखक के कहने का अर्थ यह है कि मनुष्य को अंत में मिट्टी में ही विलीन हो जाना है इसलिए उसे कभी अपने पर घमंड नहीं करना चाहिए और एक शांतिपूर्ण और सहयोग से परिपूर्ण जीवन व्यतीत करना चाहिए|
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