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टोपी शुक्ला पाठ के आधार पर बच्चों की मनोवृत्ति पर किस प्रकार प्रकाश डाला गया है?

अथवा


सपनों के से दिन पाठ के आधार पर आजकल स्कूली शिक्षा प्रणाली में क्या परिवर्तन आए हैं?

टोपी हिंदू धर्म का था और इफ़्फ़न की दादी मुस्लिम। इसके वावजूद भी जब भी टोपी इफ़्फ़न के घर जाता दादी के पास ही बैठता और उनसे अपने दिल की बाते करता। इफ्फन की दादी के साथ उसका स्नेहपूर्ण बंधन था| उनकी मीठी पूरबी बोली उसे बहुत अच्छी लगती थी। दादी पहले अम्मा का हाल चाल पूछतीं, रोज़ उसे कुछ न कुछ खाने को भी देती परन्तु टोपी खाता नहीं था। अत: दोनों का रिश्ता जाति और धर्म से परे प्यार के धागे से बँधा था| यहाँ पर लेखक ने यह समझाने का प्रयास किया है कि जब रिश्ते प्रेम से बँधे होते है तो धर्म और मजहब जैसी सभी बातें बेमानी हो जाती हैं। बच्चे फेल होने पर भावनात्मक रूप से आहत हो जाते हैं ऐसा टोपी के साथ भी हुआ| इससे बच्चों की भावनातमक मनोवृत्ति का पता चलता है| बच्चे मानसिक एवं भावनात्मक तौर पर कमजोर और स्नेह के भूंखे होते हैं जोकि इस पाठ को पढ़कर बिलकुल स्पष्ट हो जाता है| अतः बच्चों के साथ स्नेहपूर्ण व्यवहार किया जाना चाहिए साथ ही उन्हें धर्म, जाति आदि के बंधनों में बाँधने की कोशिश नहीं करनी चाहिए|


अथवा


आज की स्कूली शिक्षा प्रणाली शारीरिक दंड या किसी भी प्रकार के दंड का विरोध करती है। छात्रों की मनोदशा पर विशेष ध्यान दिया जाने लगा है। साथ ही टीचर छात्रों के हर संभव विकास का विशेष ध्यान देते हैं। बच्चों को स्कूल में आत्मनिर्भर बनना सिखाया जाता है। साथ ही बच्चों के लिए परीक्षा अब भय नहीं रह गई है बल्कि खुद को परखने का एक मापदंड है। आजकल बच्चों के मनोविज्ञान को समझने के लिए शिक्षकों को परिक्षण दिया जाता है। उन्हें सिखाया जाता है कि वे कैसे बच्चे की भावनाओं को समझें। उनके दुर्व्यवहार के कारण को समझें। उन्हें उनकी गलती का एहसास कराएं तथा उनके साथ मित्रता व ममता का व्यवहार किया जाए। वर्तमान शिक्षा प्रणाली में बच्चों के सम्पूर्ण विकास पर ध्यान ध्यान केन्द्रित किया जाता है|


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