निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर अनुच्छेद लिखिए।
ग) हस्तकला तथा शिल्प
• भूमिका
• इतिहास वर्तमान स्थिति
• भविष्य
भूमिका- हस्तशिल्प हाथ के कौशल से तैयार किए गए रचनात्मक उत्पाद हैं जिनके लिए किसी आधुनिक मशीनरी और उपकरणों की मदद नहीं ली जाती। आजकल हस्त-निर्मित उत्पादों को फैशन और विलासिता की वस्तु भी माना जाता है। हस्तशिल्प इन वस्तुओं को तैयार करने वाले परम्परावादी कारीगरों की सांस्कृतिक पहचान का दर्पण हैं।
इतिहास वर्तमान स्थिति- युगों से भारत के हस्तशिल्प जैसे कि कश्मीरी ऊनी कालीन, ज़री की कढ़ाई किए गए वस्त्र, पक्की मिट्टी (टेराकोटा) और सेरामिक के उत्पाद, रेशम के वस्त्र आदि ने अपनी विलक्षणता को कायम रखा है। प्राचीन समय में इन हस्तशिल्पों को 'सिल्क रूट' के रास्ते यूरोप, अफ्रीका, पश्चिम एशिया और दूरवर्ती पूर्व के दूरस्थ देशों को निर्यात किया जाता था। भारतीय हस्तशिल्पों की यह समूची सम्पत्ति हर युग में बनी रही है। इन शिल्पों में भारतीय संस्कृति का जादुई आकर्षण है जो इसकी अनन्यता, सौन्दर्य, गौरव और विशिष्टता का विश्वास दिलाता है।
कुछ कलाओं ने समय के साथ-साथ बढ़ती हुई माँग के अनुसार वृहद् और व्यावसायिक रुप ग्रहण कर लिया है। इस प्रकार की कलाओं के केन्द्र प्रायः रुहेलखण्ड क्षेत्र के नगर हैं। हालांकि परम्परागत ग्रामीण हस्तकलाएं भी व्यावसायिक रुप ग्रहण कर रही हैं, लेकिन उनका व्यावसायिक स्वरूप आस-पास के ग्रामीण इलाकों तक ही सीमित है।
भविष्य- देश के हस्तशिल्प उद्योग में असीम अवसर विद्यमान हैं। उत्पाद विकास एवं डिजाइन को उन्नत बनाने पर अब अधिक ध्यान दिया जा रहा है। घरेलू और पारंपरिक बाजार में भारतीय हस्तशिल्प की मांग बढ़ रही है। विकसित देशो के उपभोक्ता यहां के हस्तशिल्प की सराहना करते हैं और यह रुझान बढ़ता जा रहा है। सरकार अब इस उद्योग को समर्थन दे रही है और हस्तशिल्प के संरक्षण में दिलचस्पी ले रही है। लेटिन अमरीका, उत्तरी अमरीका और यूरोपीय देशो में उभरते बाजारों ने इस क्षेत्र में अवसर और भी बढ़ा दिए हैं। हस्तशिल्प के व्यापार में निष्पक्ष परिपाटियां भी इस क्षेत्र में अवसर बढ़ा रही हैं। भारत में अब ज्यादा पर्यटक आने लगे हैं जिससे उत्पादों के लिए बड़ा बाजार उपलब्ध हो रहा है।
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