कर चले हम फिदा गीत के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहते हैं?
अथवा
आत्मत्राण कविता में कवि की प्रार्थना सबसे भिन्न क्यों है?
‘कर चले हम फ़िदा’ गीत में बलिदान की भावना स्पष्ट रूप से झलकती है। इसलिए यह किसी एक विशेष व्यक्ति का गीत न बनकर सभी भारतीयों का गीत बन गया। कवि ने “साथियों” शब्द का प्रयोग सैनिक साथियों व देशवासियों के लिए किया है। सैनिकों का मानना है कि इस देश की रक्षा हेतु हम बलिदान की राह पर बढ़ रहे हैं। हमारे बाद यह राह सूनी न हो जाए। सभी सैनिकों व देशवासियों को इससे सतर्क रहना होगा। इस गीत में सैनिकों और भारत की भूमि को प्रेमी-प्रेमिका के रूप में दर्शाया गया है। जिस प्रकार दूल्हे को दुल्हन सबसे प्रिय होती है, उसकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी वह बखूबी समझता है, ठीक उसी प्रकार इस धरती रूपी दुल्हन पर सैनिक रूपी प्रेमी कभी विपत्ति सहन नहीं कर सकते। सन् 1962 के युद्ध में भारतीय सैनिकों ने बलिदान के रक्त से धरती रूपी दुल्हन की माँग भरी थी। इसी समानता के कारण भारत की धरती को दुल्हन कहा गया है।
अथवा
ये कविता एक ऐसे व्यक्ति की प्रार्थना से संबंधित है जो स्वयं सुब कुछ करना चाहता है। किसी हारे हुए जुआरी की तरह वह सब कुछ भगवान भरोसे नहीं छोड़ना चाहता है। उसे अपने आप पर पूरा भरोसा है। उसे भरोसा है कि वह हर मुसीबत का सामना कर सकता है और भगवान से सिर्फ मनोबल पाने की इच्छा रखता है। जब दुख से मन व्यथित हो जाए तब उसे ईश्वर से सांत्वना की अभिलाषा नहीं है, बल्कि वह ये प्रार्थना करता है कि उसे हमेशा दुख पर विजय प्राप्त हो ईश्वर उसे ऐसी शक्ति प्रदान करे| कहीं किसी से मदद ना मिले तो भी उसका पुरुषार्थ नहीं हिलना चाहिए, लाभ की जगह कभी हानि भी हो जाए तो भी मन में अफसोस नहीं होना चाहिए। कवि भगवान से अपनी जिम्मेदारियाँ कम करने की विनती नहीं करता। वह तो इतनी दृढ़शक्ति चाहता है जिससे वह जीवन के भार को निर्भय उठाकर जी सके। आत्म्त्राण कविता में कवि ने ईश्वर से अपने आपको निर्भय, स्वास्थ्य और अविजित बनाने की प्रार्थना की है|
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