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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए-

क). देवदार की छाया और फादर कामिल बुल्के के व्यक्तित्व में क्या समानता थी?


ख). शिष्या ने डरते हुए बिस्मिल्ला खाँ से क्या कहा? खाँ साहब ने उसे कैसे समझाया?


ग) बालगोबिन भगत की पुत्रवधू की ऐसी कौन सी इच्छा थी जिसे वे पूरा न कर सके?


घ). ‘एक कहानी यह भी’ नामक पाठ की लेखिका मन्नू भंडारी का साहित्य की अच्छी पुस्तकों से परिचय कैसे हुआ?

क) देवदार की छाया मन को शीतल और शांत करने वाली होती है। फादर कामिल बुल्के लेखक और उसके साथियों के साथ हंसी मजाक में निर्लिप्त शामिल रहते, गोष्ठियों में गंभीर बहस करते तथा उनकी रचनाओं पर बेबाक राय देते। इसके अलावा घरेलू उत्सवों और संस्कार में बड़े भाई और पुरोहित के समान खड़े होकर सबको आशीष देते। फादर के व्यक्तित्व की इन्हीं सब विशेषताओं के कारण लेखक ने उन्हें देवदार जोकि एक बहुत ही विशाल वृक्ष होता है उसकी छाया के समान बताया है|


ख) शिष्या ने बिस्मिल्ला खां को फटी लुंगी पहने हुए देखकर डरते हुए कहा कि आपकी इतनी प्रतिष्ठा, मान सम्मान है और भारत रत्न भी मिल चुका है और आप अभी भी फटी लुंगी पहने रहते हैं। शिष्या के ऐसा कहने पर बिस्मिल्ला खां ने उसे समझाते हुए कहा कि ठीक है आगे से हम ये नहीं पहनेंगे लेकिन बनाव सिंगार में लगे रहते तो शहनाई कैसे होती।


ग) बालगोबिन भगत की पुत्रवधू की इच्छा थी कि वह अपने पति की मृत्यु के बाद बालगोबिन भगत के पास ही रहे और वहाँ रहकर अपने ससुर की सेवा करे लेकिन बालगोबिन ने इसकी जगह उसका पुनर्विवाह करने की बात कही|


घ) हिंदी की प्राध्यापिका शीला अग्रवाल के संपर्क में आने के बाद मन्नू भंडारी का साहित्य की अच्छी पुस्तकों से परिचय हुआ। प्राध्यापिका से मिलने के पश्चात प्राध्यापिका ने मन्नू भंडारी को अच्छी पुस्तकों और उनके महत्त्व के बारे में समझाया और इस प्रकार मन्नू भंडारी का परिचय अच्छी पुस्तकों से हुआ|


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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर निर्देशानुसार लिखिए

क). श्रृंगार रस के भेदों के नाम लिखिए।


ख). करूण रस का मूल स्थायी भाव लिखिए।


ग). अद्भुत रस का अनुभाव लिखिए।


घ). हास्य रस से संबंधित काव्य पंक्तियों लिखिए।

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निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिये गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

पढ़ने लिखने में स्वयं कोई बात ऐसी नही जिससे अनर्थ हो सके। अनर्थ का बीच उसमें हरगिज नहीं। अनर्थ पुरूषों से भी होते हैं। अपढ़ों और पढ़े लिखो, दोनों से अनर्थ, दुराचार और पापाचार के कारण और ही होते हैं और वे व्यक्ति विशेष का चाल चलन देखकर जाने भी जा सकते हैं। अतएव स्त्रियों को अवश्य पढांना चाहिए। जो लोग यह कहते है कि पूराने जमाने में यहाँ स्त्रियाँ न पढती थीं अथवा उन्हें पढने की मुमानियत थी वे या तो इतिहास से अभिज्ञता नहीं रखते या जान बूझकर लोगों को धोखा देते हैं। समाज की दृष्टि में ऐसे दंडनीय हैं क्योंकि स्त्रियों को निरक्षर रखने का उपदेश समाज का अपकार और अपराध करना है-समाज की उन्नति में बाधा डालना हैं।


क) कुछ लोग स्त्री शिक्षा के विरोध में क्या तर्क देते हैं और क्यों?


ख) अनर्थ का मूल स्रोत क्या है?


ग) स्त्री शिक्षा के विरोधी दंडनीय क्यों हैं।

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निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी।।


पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूंकि पहारू।।


इहाँ कुम्हडबतिआ कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं।।


देखि कुठारू सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना।।


भृगसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु सहों रिसरोकी


सुरमहिसुर हरिजन अरू गाई। हमरे कुल इन्ह पर ने सुराई।।


सुरमहिसुर हरिजन अरू गाई। हमरे कुल इन्ह पर न सुराई।।


कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा। व्यर्थ धरहु धनु बानकुठारा।।


कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा। व्यर्थ धरहु धनु बानकुठारा।।


क) रघुकुल की परंपरा की क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?


ख) इहाँ कुम्हडबतिआ कोउ नाहीं। जे तरजनी मरि जाहीं। कहकर लक्ष्मण ने अपनी कौन सी विशेषता बताई है?


ग). प्रस्तुत काव्यांश में ‘कुम्हडबतिया’ शब्द किससे लिए प्रयोग किया गया है?

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निम्मलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए

क). ‘आत्मकथ्य’ कविता में जीवन के किस पक्ष का वर्णन किया गया है?


ख). ‘श्री सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ‘द्वारा रचित कविता ‘उत्साह’ के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए|


ग). ‘कन्यादान’ कविता में वस्त्र और आभूषणों को शाब्दिक भ्रम क्यों कहा गया है?


घ). मुख्य गायक एवं संगतकार के मध्य जुड़ी कड़ी अगर टूट जाए तो उसके क्या परिणाम हो सकते हैं ? स्पष्ट कीजिए|