निम्नलिखित मे से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर लगभग 200 से 250 शब्दों में निबंध लिखिए-
ऊर्जा की बढ़ती मांग : समस्या और समाधान
• प्रस्तावना
• ऊर्जा के परंपरागत स्त्रोतों का समाप्त होना
• नवीन स्रोतों की आवश्यकता
• हमारी ऊर्जा पर निर्भरता
• उपसंहार
ऊर्जा की बढ़ती माँग समस्या और समाधान
प्रस्तावना- ऊर्जा हमारे जीवन की प्रमुख आवश्यकता है फिर चाहे वह किसी भी रूप में हो। भोजन, प्रकाश, यातायात, आवास, स्वास्थ्य की मूलभूत आवश्यकताओं के अलावा मनोरंजन की जरूरतों में भी ऊर्जा के विभिन्न रूपों ने हमारी जीवन शैली में प्रमुख स्थान बना लिया है।
आज के समय में व्यक्ति भोजन से पहले मोबाइल खरीदने के बारे में सोचता है। बिना एयर कंडीशनर के किसी अधिकारी के लिए कार्यालय की कल्पना करना कठिन है।
ऊर्जा के परंपरागत स्रोतों का समाप्त होना- आधुनिक युग से पूर्व मनुष्य का जीवन नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर आधारित था। लेकिन आज के समय में मनुष्य जीवाश्म स्रोतों (पेट्रोल, डीजल, गैस, कोयला) पर पूरी तरह निर्भर हो चुका है। ऊर्जा के जीवाश्म स्रोत एक बार उपयोग कर लेने के बाद हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं। यह चिंता फैल रही है कि ऊर्जा के जीवाश्म स्रोतों के खत्म होने के बाद क्या होगा? चूँकि ऊर्जा के परंपरागत संसाधन पृथ्वी पर सीमित मात्रा में हैं और मानव उनका बड़ी तेजी से दोहन कर रहा है इसीलिये भविष्य में उनके खत्म होनी की आशंका बनी हुई है|
नवीन स्रोतों की आवश्यकता- यह सच है कि ऊर्जा के बिना जीवन संभव नहीं है। इसलिए हमें जीवाश्म ईंधन के खत्म होने का इंतजार करने के स्थान पर ऊर्जा के उन स्रोतों को अपनाना चाहिए जो कभी खत्म नहीं होंगे। इस तरह के ऊर्जा के स्रोत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, लघु बिजली परियोजना, गोबर गैस आदि हैं। भारत में यूर्य की रोशनी पर्याप्त मात्रा में रहती है। इस रोशनी का विविध रूप में प्रयोग करना संभव है। सूर्य की रोशनी से सोलर कुकर का उपयोग करा जाए और इसे रियायती दर पर दिए जाएं तो लोग खाना पकाने में आसानी से इसका इस्तेमाल कर पाएंगे। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा की कमी रहती है। जिसके लिए सबसे अच्छा उपाय है गोबर गैस। गोबर गैस से न केवल मु्फ्त में खाना पकेगा बल्कि रोशनी भी मिलेगी जिससे बिजली भी बचेगी।
हमारी ऊर्जा पर निर्भरता- पाषाण युग से लेकर आज तक मनुष्य निरंतर प्रगति के पथ पर चल रहा है। इस यात्रा में ऊर्जा को प्रगति की सीढ़ी कहना कोई गलत बात नहीं होगी। जैसे-जैसे मनुष्य विकास की सीढ़ी चढ़ता गया, उसकी ऊर्जा आवश्यकता बढ़ती गई। अपनी इसी जरूरत को पूरा करने के लिए मनुष्य ने कई रूपों में ऊर्जा को खोजना और प्रयोग करना शुरू कर दिया। आज रसोई से लेकर सड़क यातायात तक सभी जगह ऊर्जा के बिना जीवन की परिकल्पना नहीं की जा सकती।
उपसंहार- हमारे देश में ऊर्जा की जरूरत दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। ऊर्जा की बढ़ती मांग आने वाले वर्षों में आज से तीन या चार गुना अधिक होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में भारत सरकार की ओर से ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। इस दिशा में अनेक रूपों में कई प्रयास किए गए हैं जिनसे कुछ हद तक सफलता भी हासिल हुई है। जैसे 'बायो गैस' और अधिक वृक्षारोपण आदि।
Couldn't generate an explanation.
Generated by AI. May contain inaccuracies — always verify with your textbook.