आपकी कक्षा में कुछ छात्र छोटी कक्षाओं के विद्यार्थियों को सताते हैं। इस समस्या के बारे में प्राचार्य जी को पत्र लिखकर बताएँ और कोई उपाय भी सुझाइए|
अथवा
आज दिन-प्रतिदिन सूचना और संचार माध्यम लोगों के बीच लोकप्रिय होते जा रहे हैं। ऐसे में पत्र लेखन पीछे छूटता जा रहा है। पत्र लेखन का महत्व बताते हुए अपने मित्र को पत्र लिखिए।
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
पब्लिक स्कूल, विजयनगर, दिल्ली
विषय- कुछ छात्रों द्वारा छोटी कक्षा के छात्रों को सताने का मामला।
आदरणीय महोदय,
मैं आपके विद्यालय में कक्षा 12वीं का छात्र हूं। मेरी कक्षा के कुछ छात्र मध्याह्न भोजन के समय छोटी कक्षाओं के विद्यार्थियों को सताते हैं और उनका भोजन तक छीन लेते हैं। इस वजह से वे बच्चे बहुत परेशान रहते हैं। डर के कारण वे अध्यापकों से उनकी शिकायत नहीं कर पाते क्योंकि मेरी कक्षा के बच्चे उन्हें शिकायत करने पर सबक सिखाने की धमकी देते हैं।
आप से विनती है कि इस समस्या से छात्रों को बचाने के लिए मध्याह्न भोजन के समय हर कक्षा में एक अध्यापक और प्रांगण में आप खुद एक बार देखने जाया करें। इससे आपको ज्ञात हो जाएगा कि कौन से छात्र हैं जो छोटी कक्षा के छात्रों को परेशान करते हैं।
धन्यवाद
आपका आज्ञाकारी शिष्य
क.ख.ग
रोल नंबर- अ.आ.
अथवा
राहुल शर्मा
जैन सदन
गली नं. 15, लक्ष्मण नगर
इंदौर
दिनांक: 16 जुलाई 2018
प्रिय विनीता,
प्रेम!
आशा है कि तुम और घर पर सब कुशल मंगल होंगे। बरसों बीत गए तुम्हें पत्र लिखे हुए।
प्रिया वीनीता! मैं जब भी मोबाइल फोन पर तुमसे बात करता हूं तो अच्छा लगता है लेकिन ऐसा लगता है कि मैं तुम्हें पत्र द्वारा जो कह सकता हूं वह टेलीफोन पर नहीं कह सकता। पता नहीं इतने साल हो जाने के बाद ही कौन सा संकोच अपने मन की सारी बात कहने से मुझे रोकता है। शायद मैं चाहता हूं कि तुम सिर्फ मेरा बात सुनों और अपनी प्रतिक्रिया न दो। लेकिन मोबाइल फोन पर यह संभव नहीं होता कि सामने वाले से तुरंत प्रक्रिया ना मिले। न चाहते हुए भी बात करते समय मुंह से कुछ न कुछ निकल ही जाता है। मुझे लगता है कि पत्र लेखन सबसे गहरे संवाद का माध्यम है। इसमें एक निर्बाध वक्ता होने का सुख है। ये अपने मन की गहरी से गहरी बात कहने का सशक्त माध्यम है जो कभी खत्म नहीं होना चाहिए। जिस तरह फास्ट-फूड का कोई विकल्प नहीं हो सकता, उसी तरह संचार माध्यम भी पत्र लेखन की जगह कभी नहीं ले सकता।
अपने पत्र में मेरे इन विचारों पर टिप्पणी जरूर देना और मां बाबू जी को मेरा प्रणाम कहना।
राहुल शर्मा
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