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‘साना साना हाथ जोडि’ पाठ में कहा गया है कि कटाओ पर किसी दुकान का न होना वरदान है। ऐसा क्यों? भारत के अन्य प्राकृतिक स्थानों को वरदान बनाने में नवयुवकों की क्या भूमिका हो सकती है? स्पष्ट कीजिए।

अथवा


‘माता का अंचल’ पाठ में वर्णित तत्कालीन विद्यालयों के अनुशासन से वर्तमान युग के विद्यालयों के अनुशासन की तुलना करते हुए बताइए कि आप किस अनुशासन व्यवस्था को अच्छा मानते हैं और क्यों?

कटाओ' को वहाँ की साफ सफाई और नैसर्गिक सौंदर्य की वजह से हिंदुस्तान का स्विट्जरलैंड कहा जाता है। यहाँ बाजार एवं कोई भी दुकान नहीं है और इसी कारण से यहाँ कूड़ा कचरा कम फैलता है| इस जगह का व्यवसायीकरण अभी तक नहीं किया गया है और इसी कारण से यह क्षेत्र अब तक एक व्यापारिक क्षेत्र के रूप में विकसित नहीं हो पाया है| इन्हीं सब कारणों की वजह से कटाओ की सुन्दरता अब तक विद्यमान है| 'कटाओ' अभी तक पर्यटक स्थल नहीं बना है और इस कारण से मानव दखल कम है| यहां प्रकृति अपने पूर्ण वैभव के साथ दिखती है| इसीलिये हम कह सकते हैं कि कटाओ पर किसी दुकान का न होना उसके लिए एक वरदान के समान है|


अथवा


'माता का आंचल' पाठ में जिस विद्यालय का विवरण दिया गया है वहां अध्यापक बच्चों की पिटाई करते थे और उन्हें शारीरिक दंड देकर अनुशासन में रखना चाहते थे। आज के विद्यालयों में शारीरिक दंड और इससे संबंधित चीजें वर्जित हैं। आजकल विद्यार्थियों को समझाया जाता है और उन्हें अनुशासन में रहने के तरीके बताए जाते हैं। विद्यालय में परामर्शदाता की नियुक्ति की जाती है। वह शैक्षिक मार्गदर्शन देकर छात्रों को आत्म समायोजन और समाजिक समायोजन में सहायता देते हैं कोशिश करते हैं कि उन्हें समझाकर जीवन में सही दिशा दी जाए| अर्थात् कह सकते हैं कि आज के समय में विद्यालयों की अनुशामन व्यवस्था पुराने तरीकों से काफी अच्छी है।


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निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी।।


पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूंकि पहारू।।


इहाँ कुम्हडबतिआ कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं।।


देखि कुठारू सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना।।


भृगसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु सहों रिसरोकी


सुरमहिसुर हरिजन अरू गाई। हमरे कुल इन्ह पर ने सुराई।।


सुरमहिसुर हरिजन अरू गाई। हमरे कुल इन्ह पर न सुराई।।


कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा। व्यर्थ धरहु धनु बानकुठारा।।


कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा। व्यर्थ धरहु धनु बानकुठारा।।


क) रघुकुल की परंपरा की क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?


ख) इहाँ कुम्हडबतिआ कोउ नाहीं। जे तरजनी मरि जाहीं। कहकर लक्ष्मण ने अपनी कौन सी विशेषता बताई है?


ग). प्रस्तुत काव्यांश में ‘कुम्हडबतिया’ शब्द किससे लिए प्रयोग किया गया है?

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निम्मलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए

क). ‘आत्मकथ्य’ कविता में जीवन के किस पक्ष का वर्णन किया गया है?


ख). ‘श्री सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ‘द्वारा रचित कविता ‘उत्साह’ के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए|


ग). ‘कन्यादान’ कविता में वस्त्र और आभूषणों को शाब्दिक भ्रम क्यों कहा गया है?


घ). मुख्य गायक एवं संगतकार के मध्य जुड़ी कड़ी अगर टूट जाए तो उसके क्या परिणाम हो सकते हैं ? स्पष्ट कीजिए|

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निम्नलिखित मे से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर लगभग 200 से 250 शब्दों में निबंध लिखिए-

स्वच्छ भारत एक कदम स्वच्छता की ओर


प्रस्तावना


स्वच्छता का महत्व


वर्तमान समय में स्वच्छता को लेकर भारत की स्थिति


स्वच्छ भारत अभियान का आरंभ एवं लक्ष्य


उपसंहार

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निम्नलिखित मे से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर लगभग 200 से 250 शब्दों में निबंध लिखिए-

ऊर्जा की बढ़ती मांग : समस्या और समाधान


प्रस्तावना


ऊर्जा के परंपरागत स्त्रोतों का समाप्त होना


नवीन स्रोतों की आवश्यकता


हमारी ऊर्जा पर निर्भरता


उपसंहार