निम्मलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए
क). ‘आत्मकथ्य’ कविता में जीवन के किस पक्ष का वर्णन किया गया है?
ख). ‘श्री सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ‘द्वारा रचित कविता ‘उत्साह’ के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए|
ग). ‘कन्यादान’ कविता में वस्त्र और आभूषणों को शाब्दिक भ्रम क्यों कहा गया है?
घ). मुख्य गायक एवं संगतकार के मध्य जुड़ी कड़ी अगर टूट जाए तो उसके क्या परिणाम हो सकते हैं ? स्पष्ट कीजिए|
क) 'आत्मकथ्य' कविता में कवि ने जीवन के यथार्थ और अभाव पक्ष का वर्णन किया गया है। इस पाठ के माध्यम से कवि ने यह बताया है कि किस प्रकार से एक आम इंसान को अपने जीवन में किस प्रकार अभावों और यथार्थ से परिपूर्ण जीवन जीना पड़ता है साथ ही कवि ने इससे संघर्ष करने की बात भी पाठ में कही है|
ख) 'श्री सूर्यकांत त्रिपाठी निराला' द्वारा रचित कविता का शीर्षक 'उत्साह' इसलिए रखा गया है क्योंकि बादल वर्षा करके पीड़ित प्यासे जन की आकांक्षा को पूरा करके उनके जीवन में आशा, उत्साह और नई चेतना का संचार करते हैं। यह शीर्षक इस कविता के लिए सबसे उपयुक्त है क्योंकि बादलों की वर्षा के पश्चात आम जन, पेड़ पौधे आदि में उत्साह का संचार होते है|
ग) शब्दों के भ्रम की तरह ही नारी जीवन भर वस्त्र और आभूषणों के मोह में बंधी रहती है| वह अपने सम्पूर्ण जीवन में वस्त्रों और आभूषणों का भारी मात्रा में संग्रह करती है जितना कि वह उपभोग भी नहीं कर सकती| इसलिए कवि ने कन्यादान कविता में वस्त्राभूषणों को 'शाब्दिक भ्रम' कहकर उन्हें नारी जीवन का बंधन माना है। अर्थात नारी इन वस्त्र और आभूषणों के क्षणिक सुख के कारण इनके बंधन में बंधकर रह जाती है और जीवन के असली सुखों से वंचित रहती है|
घ) अगर यह कड़ी टूट गई तो मुख्य गायक अपने गायन को सफलतापूर्वक और कुशलता से पूर्ण नहीं कर पायेगा| जब मुख्य गायक अपने सुरों से भटकने लगेगा तो कोई उसे संभालने वाला नहीं होगा, गाते-गाते उसकी सांस फूलने पर कोई उसे सहयोग करने वाला गायक नहीं होगा| अतः आसान भाषा में कहा जाए तो मुख्य गायक और संगतकार के बीच की कड़ी मुख्य गायक की सफलता के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है|
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