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निर्देशानुसार वाच्य परिवर्तित कीजिए-

क) चलो, घूमने चलते हैं। (वाच्य का भेद लिखिए)


ख) क्या आपके द्वारा पूरी कहानी पढ़ ली गई। (कर्तवाच्य में)


ग) फादर रिश्ते बनाकर तोड़ते नहीं थे। (कर्मवाच्य में)


घ) मैं इस पेड़ पर नहीं चढ़ सकता। (भाववाच्य में)

क)- कर्म वाच्य


) क्या आपने पूरी कहानी पढ़ ली।


ग)- फादर के द्वारा रिश्ता बनाकर तोड़ा नहीं जाता था|


) मुझसे इस पेड़ पर नहीं चढ़ा जाता।


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निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर प्रत्येक लगभग 20 शब्दों में लिखिए-

निर्मम कुम्हार की थापी से कितने रूपों में कुटी-पुटी


हर बार बिखेरी गई किंतु मिट्टी फिर भी तो नहीं मिटी।


आशा में निश्छल पल जाए, छलना में पड़कर छल जाए


सूरज दमके तो तप जाए, रजनी ठुमके तो ढल जाए


यों तो बच्चों की गुड़िया-सी, भोली मिट्टी की हस्ती क्या


आँधी आए तो उड़ जाए, पानी बरसे तो गल जाए।


फ़सलें उगतीं, फ़सलें कटती लेकिन धरती अविनश्वर है।


मिट्टी की महिमा मिटने में मिट-मिट हर बार सँवरती है।


मिट्टी मिट्टी पर मिटती है, मिट्टी मिट्टी को रचती है।


क) ‘भोली मिट्टी की हस्ती क्या’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है?


ख) वे कौन सी परिस्थितियाँ हैं, जो मिट्टी के स्वरूप को मिटाने में असफल रहती हैं ?


ग) सूरज के दमकने पर मिट्टी पर क्या प्रभाव पड़ता है?


घ) धरती के सदा उर्वर रहने का क्या प्रमाण है?


ङ) मिटाने का प्रयास करने पर भी धरती कैसी रहती है?

3

निर्देशानुसार उत्तर लिखिए-

) जो अध्यापिका हिंदी पढ़ाती हैं, वे मेरी माँ हैं।


(आश्रित उपवाक्य छाँटकर उसका भेद लिखिए)


) मैं अस्वस्थ था इसलिए परीक्षा नहीं दे सका।


(सरल वाक्य में बदलिए)


) परिश्रम करने से लोग जीवन में सफल होते हैं।


(संयुक्त वाक्य में बदलिए)

5

रेखांकित पदो का पद-परिचय लिखिए-

आजकल देश प्रगति के मार्ग पर बढ़ रहा है।

6

क) काव्यांश में निहित रस पहचानकर लिखिए-

हे सारथे ! हैं द्रोण क्या, देवेंद्र भी आकर अड़े,


है खेल क्षत्रिय बालकों का व्यूहभेदन कर लड़े।


मैं सत्य कहता हूँ सखे! सुकुमार मत जानो मुझे,


यमराज से भी युद्ध को प्रस्तुत सदा मानो मुझे।।


ख) करुण रस का एक उदाहरण लिखिए ।


ग) श्रृंगार रस के स्थायी भाव का नाम लिखिए ।


घ) वात्सल्य रस का स्थायीभाव क्या है?