निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर प्रत्येक लगभग 20 शब्दों में लिखिए-
बेटे के क्रिया-कर्म में तूल नहीं किया; पतोहू से ही आग दिलाई उसकी। किंतु ज्योंही श्राद्ध की अवधि पूरी हो गई, पतोहू के भाई को बुलाकर उसके साथ कर दिया, यह आदेश देते हुए कि इसकी दूसरी शादी कर देगा। इधर पतोहू रो-रोकर कहती- मैं चली जाऊँगी तो बुढ़ापे में कौन आपके लिए भोजन बनाएगा? बीमार पड़े, तो कौन एक चुल्लू पानी भी देगा ? मैं पैर पड़ती हूँ, मुझे अपने चरणों से अलग नहीं किजिए। लेकिन भगत का निर्णय अटल था। तू जा, नहीं तो मैं ही इस घर को छोड़कर चल दूँगा- यह थी उनकी आखिरी दलील और इस दलील के आगे बेचारी की क्या चलती?
क) बालगोबिन भगत द्वारा पुत्र का दाह-संस्कार पतोहू से ही कराने तथा विधवा बहू की दूसरी शादी रचाने के निर्देश में उसकी किस विचारधारा का परिचय मिलता है?
ख) भगत की पतोहू उन्हें छोड़कर नहीं जाना चाहती थी। दो कारणों का उल्लेख कीजिए।
ग) भगत ने पतोहू के भाई को बुलाकर क्या आदेश दिया?
क)— बालगोबिन भगत ने अपने पुत्र का दाह—संस्कार पतोहू से कराया। साथ ही अपनी विधवा बहू की दूसरी शादी रचाने का भी निर्देश दिया। इससे उनके प्रगतिशील एवं आधुनिक विचारधारा के समर्थक होने का पता चलता है| इससे पता चलता है कि वो रूढ़िवादी नहीं थे। बालगाबिन उचित निर्णय लेते थे। वो समाज के दबाव में आकर कोई काम नहीं करते थे। ऐसा करके उन्होंने सदियों से चली आ रही परंपराओं को चुनौती दी थी।
ख)— भगत की पतोहू को डर था कि उनके बुढ़ापे में कौन उनका साथ देगा। इसके अलावा बीमार या कोई अनहोनी होने पर कौन भगत की सेवा करेगा। इस डर से वो भगत को छोड़कर नहीं जाना चाहती थी और उसी घर में रहकर बालगोबिन भगत की सेवा करना चाहती थीं|
ग)— बालगोबिन भगत के पुत्र की मृत्यु के पश्चात उन्होंने अपने बेटे की पत्नी अर्थात अपनी पतोहू को पुनर्विवाह की अनुमति दे दी| उन्होंने अपनी पतोहू के भाई को बुलाकर कहा कि वो उसे यहां से ले जाए और उसकी दूसरी शादी करवा दे।
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