जन-जागरण में समाचार-पत्रों की क्या भूमिका होती है? ‘जार्ज पंचम की नाक’ पाट के आधार पर जीवन-मूल्यों की दृष्टि से लगभग 150 शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
अथवा
हिरोशिमा की घटना विज्ञान का भयानकतम दुरुपयोग है। आज विज्ञान का दुरूपयोग किस रूप में हमारे सामने आ रहा है ? ‘मैं क्यों लिखता हूँ ? पाठ के आधार पर मानव-मूल्यों की दृष्टि से लगभग 150 शब्दों में उत्तर लिखिए।
आधुनिक भारत में समाचार पत्रों की अहम भूमिका है। समाज में होने वाली हर छोटी—बड़ी घटना के बारे में समाचार पत्र से ही पता चलता है। समाचार पत्र लोगों को जागरूक करने का भी काम करते हैं। इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति परेशानी में होता है तो मीडिया में अपनी बात रखकर अधिकारियों तक आसानी से पहुंच सकता है। इसके अलावा समाचार पत्रों से लोगों तक गलत संदेश भी पहुंचते हैं। पहनावे और खान—पान संबंधी आर्टिकल युवाओं को आकर्षित करते हैं और इन्हें पढ़कर वो वैसा ही बनने की कोशिश करते हैं। इस तरह की पत्रकारिता से समाज का नुकसान ही होता है। युवा पीढ़ी तड़क—भड़क की दुनिया की ओर भागने लगती है। समाचार पत्रों में खबरों को बढ़ा—चढ़ाकर बताया जाता है। इससे लोगों तक सही जानकारी नहीं पहुंच पाती है। समाचार पत्रों के समाज पर दोनों प्रकार के प्रभाव पड़ते हैं अगर समाचार पत्र में सही मुद्दों को लेकर ख़बरें छापी जाएँ तो जन जागरण में यह सबसे महत्वपूर्ण साबित हो सकता है| वर्तमान दौर में जन जागरण में समाचार पत्र सबसे महत्वपूर्ण साधन है|
अथवा
आज विज्ञान का दुरुपयोग कई तरह से हो रहा है। इसके दुरूपयोग को समझने का सबसे सटीक उदाहरण है हिरोशिमा की बम दुर्घटना जिसमें लाखों लोग को पल भर में मौत के मुँह में धकेल दिया| इससे पता चलता है कि विज्ञान का उपयोग अगर गलत तरीके से किया जाए तो यह मानव सभ्यता का अंत कर सकता है| वर्तमान में दुनिया के अग्रणी देश जीवाश्म ईंधनों का बढ़—चढ़कर उपयोग कर रहे हैं जिससे पर्यावरण धीरे-धीरे विनाश की ओर बढ़ रहा है। कई वैज्ञानिक आज इंसानों के क्लोन बनाने की बात कर रहे हैं। विज्ञान ने कंप्यूटर बनाया और फिर इंटरनेट। ये दोनों ही चीजें मानव के कार्यों के बोझ को कम करने के लिए बनाई गई थीं। मानव ने इसका दुरुपयोग कर साइबर क्राइम को जन्म दिया है। विज्ञान के दुरुपयोग से भ्रूण हत्याएं बढ़ रही हैं। कीटनाशकों का प्रयोग अब आत्महत्या के लिए होने लगा है। विज्ञान का दुरुपयोग रोकने के लिए सबसे पहले खुद से शुरुआत करनी चाहिए। साथ ही समाज को पर्यावरण को लेकर जागरूक करना भी हमारी जिम्मेदारी है। कोशिश करनी चाहिए कि पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुँचे।
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