क) काव्यांश में निहित रस पहचानकर लिखिए-
हे सारथे ! हैं द्रोण क्या, देवेंद्र भी आकर अड़े,
है खेल क्षत्रिय बालकों का व्यूहभेदन कर लड़े।
मैं सत्य कहता हूँ सखे! सुकुमार मत जानो मुझे,
यमराज से भी युद्ध को प्रस्तुत सदा मानो मुझे।।
ख) करुण रस का एक उदाहरण लिखिए ।
ग) श्रृंगार रस के स्थायी भाव का नाम लिखिए ।
घ) वात्सल्य रस का स्थायीभाव क्या है?
क)— वीर रस
जब किसी रचना या वाक्य आदि से वीरता जैसे स्थायी भाव की उत्पत्ति होती है, तो उसे वीर रस कहा जाता है। जैसे की ऊपर दी गयी रचना से वीरता जैसे स्थाई भाव की उत्पत्ति होती है|
ख)— हाय राम कैसे झेलें हम अपनी लज्जा अपना शोक
गया हमारे ही हाथों से अपना राष्ट्र पिता परलोक
हुआ न यह भी भाग्य अभागा
किस पर विकल गर्व यह जागा
रहे स्मरण ही आते
सखि वे मुझसे कहकर जाते
ग)— श्रृंगार रस का स्थायी भाव रति (प्यार) होता है।
इसका स्थाई भाव रति होता है नायक और नायिका के मन में संस्कार रूप में स्थित रति या प्रेम जब रस की अवस्था
में पहुँच जाता है तो वह श्रंगार रस कहलाता है
घ)— वात्सल्य रस का स्थायी भाव वात्सल्यता होता है।
इसका स्थायी भाव वात्सल्यता (अनुराग) होता है माता का पुत्र के प्रति प्रेम, बड़ों का बच्चों के प्रति प्रेम, गुरुओं का
शिष्य के प्रति प्रेम, बड़े भाई का छोटे भाई के प्रति प्रेम आदि वात्सल्य रस के उदाहरण हैं|
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