निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
सृष्टि ने मानव को जो सर्वश्रेष्ठ वरदान दिए हैं उनमें से एक महत्वपूर्ण वरदान है – स्वस्थ शरीर । स्वस्थ शरीर से ही जिंदगी की सही शुरुआत होती है। अस्वस्थ शरीर में कहाँ जीवन होता है? वह तो जीवन पर बोझ होता है। जीवन के सभी सुख, सौंदर्य, सभी आनंद स्वस्थ होने पर ही मिलते हैं। स्वास्स्थ्य सभी जीवधारियों के आनंदमय जीवन की कुंजी है; क्योंकि स्वास्थ्य के बिना जीवधारियों की समस्त क्रियाएँ-प्रक्रियाएं रुक जाती हैं या शिथिल हो जाती हैं। जीवन को जल भी इसलिए कहा जाता है। जिस प्रकार रुका जल सड़ जाता है, दुर्गन्धयुक्त हो जाता है, ठीक इसी प्रकार शिथिल और कर्महीन जीवन से स्वास्थ्य खो जाता है। स्वास्थ्य और खेल-कूद का परस्पर गहरा संबंध है। पशु-पक्षी हो या मनुष्य, जो खेलता-कूदता नहीं, वह उत्फुल्ल और प्रसन्न रह नहीं सकता। जब हम खेलते हैं तो हममें नया प्रणावेग, नई स्फूर्ति और नई चेतना आ जाती है। हम देखते हैं कि हवा के झोंके एक-दूसरे का पीछा करते हुए दूर-दूर तक दौड़ते हैं, वृक्षों की शाखाओं को हिला-हिलाकर अठखेलियाँ करते हैं। आकाश में उड़ते पक्षी तरह-तरह की क्रीडाएं करते हैं। हमें भी जीवन-जगत से प्रेरणा लेते हुए खुले मन से खेल-कूद में भाग लेना चाहिए।
(क) स्वास्थ्य और खेल-कूद परस्पर एक दूसरे के पूरक हैं -कैसे?
(ख) उदाहरण देते हुए सिद्ध कीजिए की प्रकृति भी खेल-कूद पसंद करती है।
(ग) स्वास्थ्य का कर्म से क्या संबंध है?
(घ) जीवन को जल क्यों कहा गया है?
(ङ) उपर्युक्त गद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
(क) स्वास्थ्य और खेल-कूद दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं क्योंकि जब मनुष्य खेलता-कूदता है तो प्रसन्न रहता है। मनुष्य में नई-चेतना और नई स्फूर्ति आती है जिससे वो स्वस्थ्य रहता है।
(ख) हम अक्सर देखते हैं कि हवा के झोंके एक-दूसरे का पीछा करते हुए दूर-दूर तक दौड़ते हैं। वृक्षों की शाखाओं को हिला-हिलाकर अठखेलियाँ करते हैं। इस तरह से हम कह सकते हैं कि प्रकृति भी खेल-कूद पसंद करती है।
(ग) जिस तरह रुका हुआ पानी धीरे-धीरे सड़ने लगता है उसी तरह अगर शरीर से काम ना लिया जाए तो शरीर अस्वस्थ हो जाता है। इसलिए अपनी दिनचर्या में खेल-कूद और भागना-दौड़ना भी अवश्य शामिल करना चाहिए।
(घ) जीवन को जल भी कहा जाता है। जिस प्रकार रुका जल सड़ जाता है, दुर्गन्धयुक्त हो जाता है, ठीक इसी प्रकार शिथिल और कर्महीन जीवन से स्वास्थ्य खो जाता है। इस प्रकार हम जीवन को जल के समान मान सकते हैं।
(ङ) पाठ में स्वास्थ्य और खेलकूद के बारे में बताया गया है। इसलिए दिए गए गद्यांश के दो उपयुक्त शीर्षक हो सकते है। पहला- स्वस्थ शरीर। दूसरा- स्वास्थ्य और खेलकूद।
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