निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए-
(1) ‘संगतकार’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि संगतकार जैसे व्यक्ति सर्वगुण सम्पन्न होकर भी समाज में आगे न आकर प्राय: पीछे ही क्यों रहते हैं?
(2) धनुष भंग करने वाली सभा में एकत्रित जन ‘हाय-हाय’ क्यों पुकारने लगे थे?
(3) ‘राम-लक्ष्मण परशुराम संवाद’ पाठ के आधार पर अपने विचार लिखिए।
(4) वर्तमान सन्दर्भों में ‘कन्यादान’ कविता कितनी उपयुक्त है? स्पष्ट कीजिए।
(5) सामाजिक क्रांति में साहित्य की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ‘उत्साह’ कविता के आधार पर इस कथन की समीक्षा किजिए।
(6) यह ‘दंतुरित मुस्कान’ कविता में ‘बाँस और बबूल’ किसके प्रतीक बताए गए हैं?
इन पर शिशु की मुस्कान का क्या असर होता है?
(1) जहां कहीं भी संगीत सभा का आयोजन होता है वहां मुख्य संगीतकार के साथ उसका साथ देने के लिए संगतकार साथ जाया करते हैं। प्रतिभा के धनी होने के बावजूद किसी का उनपर ध्यान नहीं जाता है। वो संगीतकार की ताल से ताल मिलाते हैं। मुख्य कलाकार का महिमामंडन इतना ज्यादा होता है कि संगतकार प्रतिभाशाली होने के वावजूद भी पीछे रह जाते हैं। साथ ही वे अपनी त्याग और परोपकार की भावना के चलते भी पीछे रहते हैं।
(2) सभा में परशुराम और लक्ष्मण के बीच तीखी नोंक-झोक हुई थी। जिसे राम ज्यादा आगे नहीं बढ़ने देते हैं। लक्ष्मण ने छोटा होने पर भी अपने व्यंग्य वचनों से परशुराम के क्रोध को और बढ़ा दिया। लक्षमण और परशुराम की नोक-झोंक सुनने के बाद सभा में बैठे लोग हाय-हाय करने लगते हैं।
(3) यह संदर्भ तुलसीदास द्वारा लिखे गए रामचरितमानस के बाल कांड से लिया गया है। ये पूरा संदर्भ उस समय का है जब भरी सभा में परशुराम और लक्ष्मण की तीखी नोक-झोक हो जाती है। परशुराम गुस्सैल स्वभाव के हैं। वहीं लक्षमण अपने नटखट व्यंग्य से परशुराम का गुस्सा और बढ़ा देते हैं। तभी श्रीराम अपने जल जैसे शीतल वाक्य बोलकर परशुराम के गुस्से को शांत करते हैं। यहाँ मूल रूप से दो भिन्न स्वभाव के व्यक्तित्वों के बारे में चर्चा की गयी है कि कैसे राम अपने विनम्र स्वभाव के कारण मर्यादा पुरुषोत्तम हैं वही परशुराम और लक्ष्मण दोनों गुस्सैल स्वभाव के हैं।
(4) ससुराल जाने से पहले एक मां अपनी बेटी को बहुत सारी सीख देती है। मां अपनी बेटी को सारे हक बताती है। ऐसा वो अपनी बेटी के भले के लिए करती है। लेकिन जब जब नई बहू घर में आती है तो परिवारवालों द्वारा उस पर दबाव बनाया जाता है। मां नहीं चाहती कि उसकी बेटी का कोई फायदा उठाए लेकिन वहीं अगर उसी माँ के घर में कोई लड़की बहु बनकर आती है तो वह उसके साथ बेटी के जैसे व्यवहार नहीं करती बल्कि सास जैसा व्यवहार करती है। इसके पीछे दहेज़ भी एक मुख्य कारण है। इस प्रकार की परिस्थितियाँ भूतकाल से चली आ रही हैं और वर्तमान में भी समाज में व्याप्त हैं। इसलिए यह कविता वर्तमान सन्दर्भ में उतनी ही सार्थक है।
(5) उत्साह कविता में कवि ने समाज के उन कवियों से जो कविता लिखते हैं से कहा है कि वे अपनी कविताओं में बिजली की तेजी, क्रान्ति और चेतना का स्वर भर दें ताकि उसके द्वारा इस समाज में बदलाव लाया जा सके। उनकी कविता पढ़कर लोगों के मन पर प्रभाव पड़े और वो अपने समाज को बदलने के लिए प्रेरित हों। कवि अपनी धारदार कविता से सामाजिक क्रांति ला सकते हैं ऐसा माना जाता है और उत्साह कविता में क्रांति लाने वाली कृतियाँ लिखने का अनुरोध कवि ने कविताकारों से किया है।
(6) दंतुरित मुस्कान कविता में कवि ने बाँस और बबूल की तुलना निष्ठुर ह्रदय वाले लोगों से की है। इस कविता में कवि ने एक बच्चे की सुंदरता का बखान किया है। कवि कहता है कि बच्चे के चेहरे में ऐसा जादू होता है जिसे छू लेने अथवा देख लेने भर से बांस या बबूल जैसे निष्ठुर स्वभाव वाले वृक्षों से भी फूल झरने लगते हैं। बांस और बबूल ऐसे पेड़ हैं जिनपर फूल नहीं लगते हैं अर्थात इनकी प्रकृति निष्ठुर स्वभाव वाले लोगों की तरह होती है।
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